जस्टिस वर्मा पर एक्शन की तैयारी, सरकार कर रही ये खास काम, घर पर मिले थे नोटों से भरे बोरे

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 12 Jul 2025, 05:22 pm
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दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एक्शन की तैयारी है। भारत सरकार उन्हें हटाने के प्रयासों में जुट गई है। सरकार ने इसको लेकर एक नया कदम उठाया है। आइये खबर में पूरा मामला जान लेते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए लोकसभा के सांसदों से हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कई सांसद पहले ही दस्तखत कर चुके हैं। यह संकेत है कि प्रस्ताव मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किया जा सकता है। किसी भी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।


संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जस्टिस वर्मा को हटाने का प्रस्ताव 21 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में पेश किया जाएगा। जस्टिस वर्मा वर्तमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट में तैनात हैं, हालांकि उन्हें किसी भी न्यायिक कार्य की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। मामला तब चर्चा में आया जब 14 मार्च को लुटियंस दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में आग लग गई। बाद में वहां से 500-500 रुपए के जले हुए नोटों के बंडलों से भरे बोरे बरामद किए गए। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित तीन सदस्यीय पैनल ने की थी और इसकी रिपोर्ट 19 जून को सार्वजनिक हुई।


64 पन्नों की रिपोर्ट में बताया गया कि जस्टिस वर्मा और उनके परिवार का स्टोर रूम पर सीक्रेट और एक्टिव कंट्रोल था। पैनल की अध्यक्षता पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू ने की। जांच टीम ने दस दिनों तक गहन पड़ताल की, 55 गवाहों से पूछताछ की और संबंधित स्थान का दौरा भी किया। रिपोर्ट के निष्कर्षों में यह भी कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा 22 मार्च को भेजे गए पत्र में लगाए गए आरोपों को सही ठहराया जा सकता है। पैनल ने माना कि आरोप इतने गंभीर हैं कि न्यायाधीश को हटाने की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। इस तरह सरकार की कार्रवाई को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगर यह महाभियोग प्रस्ताव पारित होता है तो यह भारत के न्यायिक इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना होगी।


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