कौन है किडनी रैकेट की सरगना डॉ. प्रीति आहूजा, IMA उपाध्यक्ष कैंप लगाकर पति के साथ मिलकर करती थी काले कारनामे, अस्पताल कर्मी भी करते थे मदद

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 01 Apr 2026, 04:25 pm
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कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें डॉक्टर दंपती पर गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस की जांच में एक महीने बाद पूरा नेटवर्क सामने आया। मामले में मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है और कई डॉक्टरों से पूछताछ होगी।

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसे उजागर करने में पुलिस को करीब एक महीने की कड़ी मेहनत करनी पड़ी। लोकल इंटेलीजेंस यूनिट (LIU), क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने गहन जांच के बाद इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। इस रैकेट की सरगना डॉक्टर प्रीति आहूजा और उनके पति डॉक्टर सुरजीत आहूजा बताए जा रहे हैं, जिन पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को झांसे में लेकर अवैध ट्रांसप्लांट कराने का आरोप है। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस दोनों ही सख्त कार्रवाई की तैयारी में हैं।


पावरफुल नेटवर्क और बड़े संगठनों से जुड़ाव

डॉ. प्रीति आहूजा का शहर के कई बड़े मेडिकल संगठनों से जुड़ाव रहा है, जिससे उनका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है। वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की शहर इकाई में उपाध्यक्ष के पद पर भी हैं। इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। इसी प्रभाव के चलते छोटे डॉक्टर और स्टाफ उनके झांसे में आसानी से आ जाते थे और कई बार उनके कामों पर ध्यान नहीं दिया जाता था। हालांकि मामला सामने आने के बाद IMA समेत अन्य संगठन फिलहाल किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।


अस्पताल में एक साल से चल रहा था अवैध ट्रांसप्लांट का खेल

कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र स्थित आहूजा हॉस्पिटल में पिछले एक साल से अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका जताई जा रही है। करीब दो साल पहले शुरू हुए इस अस्पताल में 35 बेड की सुविधा है और यहां कई तरह के इलाज किए जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, अस्पताल के पास किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति नहीं थी, इसके बावजूद यहां यह अवैध काम किया जा रहा था। अब स्वास्थ्य विभाग उन डॉक्टरों से भी पूछताछ करेगा, जो यहां सेवाएं दे रहे थे और ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों का इलाज कर रहे थे।


हेल्थ कैंप के जरिए बनाते थे शिकार

जांच में सामने आया है कि डॉक्टर प्रीति और उनके पति फ्री हेल्थ कैंप लगाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। बाहर से आए लोग इन्हें बड़े डॉक्टर समझकर भरोसा कर लेते थे। इसके बाद एक टीम के जरिए मरीजों को लाने-ले जाने और पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता था। एम्बुलेंस ड्राइवर तक इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया था। धीरे-धीरे इस रैकेट में अन्य अस्पतालों को भी शामिल कर लिया गया, जिससे इसका दायरा और बढ़ता गया।


ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की हालत गंभीर

इस रैकेट का शिकार बनी एक महिला की हालत अब गंभीर बनी हुई है। उसका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, शरीर में क्रिएटिनिन का स्तर काफी ज्यादा है और हीमोग्लोबिन खतरनाक स्तर तक गिर गया है। डॉक्टरों को शक है कि शरीर नई किडनी को स्वीकार नहीं कर रहा, जिससे उसकी हालत बिगड़ती जा रही है। ऐसे में उसे तुरंत किसी बड़े और मान्यता प्राप्त अस्पताल में शिफ्ट करने की जरूरत बताई गई है।


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