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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 09 Mar 2026, 03:53 pm
रमजान के पाक महीने की 19वीं तारीख को लखनऊ में अकीदत और गम के माहौल में ‘गिलीम’ यानी कंबल के ताबूत का जुलूस निकाला गया। इस ऐतिहासिक जुलूस में शिया समुदाय के करीब 25 हजार लोग शामिल हुए। चार किलोमीटर लंबे इस जुलूस में पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी काले कपड़ों में नजर आए। हर कोई ताबूत को एक नजर देखने, छूने और चूमने की कोशिश करता दिखाई दिया। माहौल पूरी तरह गमगीन था और अकीदतमंद मातम करते हुए आगे बढ़ रहे थे। जुलूस शुरू होने से पहले सआदतगंज स्थित कूफा मस्जिद में मजलिस का आयोजन किया गया। यहां नमाज अदा की गई और हजरत अली की याद में दुआएं मांगी गईं। इसके बाद जुलूस मस्जिद से निकलकर टूरियागंज, सरकटा नाला और बिल्लौचपुरा होते हुए चौक स्थित पाटा नाला इमामबाड़ा तकि जैदी पहुंचकर समाप्त हुआ। पूरे रास्ते लोग जुलूस के इंतजार में खड़े नजर आए और जैसे ही ताबूत पहुंचा, अकीदतमंद उसे छूने और चूमने के लिए आगे बढ़ने लगे।
मातम, आलम और अकीदत का अनोखा नजारा
जुलूस के दौरान अकीदतमंद हजरत अब्बास का आलम लेकर चल रहे थे और मातम कर रहे थे। अकबरी गेट के पास जुलूस पहुंचने पर भीड़ और बढ़ गई। लोग काले कपड़े पहनकर पहले से ही जुलूस के इंतजार में बैठे थे। बिल्लौचपुरा चौराहे पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि करीब 1400 वर्ष पहले सन 40 हिजरी में इसी दिन इराक की मस्जिद में नमाज के दौरान हजरत अली पर तलवार से हमला किया गया था। उनके सिर पर गंभीर चोट लगी थी और 21 रमजान को उनकी शहादत हुई थी। इसी घटना की याद में हर साल यह जुलूस निकाला जाता है। उन्होंने कहा कि हजरत अली का संदेश इंसानियत और बराबरी का था। अगर उनके बताए रास्ते पर दुनिया चले तो कोई भी इंसान भूखा या बेघर नहीं रहेगा।
जुलूस में कड़ी सुरक्षा, ड्रोन और CCTV से निगरानी
इतने बड़े जुलूस को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक जुलूस में करीब 25 हजार लोग शामिल होते हैं, इसलिए सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। करीब 10 एडिशनल एसपी, 32 डिप्टी एसपी और 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को बाहर से बुलाकर लगाया गया। इसके अलावा 12 कंपनी पीएसी, दो कंपनी RAF और CRPF भी तैनात रहीं। जुलूस के रास्ते में 91 जगहों पर रूफटॉप ड्यूटी लगाई गई, जहां पुलिसकर्मी इमारतों की छतों से निगरानी करते रहे। 52 संवेदनशील स्थानों पर CCTV कैमरे लगाए गए और ड्रोन से भी पूरे इलाके पर नजर रखी गई। महत्वपूर्ण चौराहों पर इंस्पेक्टर और एसीपी की तैनाती की गई थी, ताकि जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
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