ईरान बोला- युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ, अभी भी जंग जैसे हालात, दुश्मन ने हमला किया तो हम भी नए तरीके से देंगे जवाब

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 29 Apr 2026, 11:42 am
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ईरान ने कहा कि हालात अब भी जंग जैसे हैं और किसी भी नई कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिका के साथ तनाव, तेल कीमतों में बढ़ोतरी और यूएई के ओपेक छोड़ने से वैश्विक बाजार पर असर पड़ा है।

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। Iran ने साफ कहा है कि उसके लिए हालात अब भी जंग जैसे बने हुए हैं और स्थिति सामान्य नहीं मानी जा सकती। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि युद्ध भले ही खुले तौर पर न दिख रहा हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं। उन्होंने बताया कि हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है और किसी भी नई कार्रवाई का जवाब नए हथियारों और नई रणनीति से दिया जाएगा। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर, कीमतें बढ़ीं
इस तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं United Arab Emirates ने 59 साल बाद OPEC से अलग होने का फैसला किया है, जिसे बड़ा भू-राजनीतिक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लेकिन अल्पकाल में कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है।


अमेरिका-ईरान के बीच टकराव जारी
ईरान और United States के बीच तनाव भी कम होता नहीं दिख रहा। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन Donald Trump ने इसे ठुकरा दिया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए नाकेबंदी जारी रखने की रणनीति अपनाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका बंदरगाहों तक जहाजों की आवाजाही सीमित कर ईरान के तेल निर्यात को प्रभावित करना चाहता है।


नौकरियों पर संकट, तेल भंडारण भी भरने के करीब
ईरान सरकार के मुताबिक, मौजूदा हालात के चलते देश में करीब 10 लाख नौकरियां खत्म हो चुकी हैं, जबकि आने वाले समय में करोड़ों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी पाबंदियों के कारण ईरान अपना तेल निर्यात नहीं कर पा रहा, जिससे स्टोरेज तेजी से भर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो ईरान को तेल उत्पादन घटाना पड़ सकता है, जिसका असर लंबे समय तक उसकी ऊर्जा क्षमता पर पड़ेगा।


परमाणु मुद्दे पर गतिरोध कायम
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी टकराव बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान सीमित अवधि तक ही रोक लगाने की बात कर रहा है। यूरेनियम भंडार, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता बनी रहेगी।


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