बटुकों के यौन शोषण के मामले में शंकराचार्य को बड़ी राहत, हाइकोर्ट ने दी जमानत, कहा- चार्जशीट दाखिल होने तक नहीं होगी गिरफ्तारी

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 25 Mar 2026, 05:43 pm
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत दी। कोर्ट ने चार्जशीट तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई और मीडिया बयानबाजी पर भी सख्त शर्तें लागू कीं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने साफ कहा कि चार्जशीट दाखिल होने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। यह फैसला जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने दोपहर बाद सुनाया। इस फैसले के बाद शंकराचार्य को फिलहाल राहत मिल गई है, लेकिन जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। कोर्ट के इस निर्णय को मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई थी और लगातार कानूनी प्रक्रिया चल रही थी।


कड़ी शर्तों के साथ मिली जमानत
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले से जुड़े दोनों पक्ष मीडिया में किसी भी तरह की बयानबाजी नहीं करेंगे और न ही इंटरव्यू देंगे। इसके अलावा, शंकराचार्य के विदेश जाने पर भी रोक लगाई गई है। यदि उन्हें विदेश यात्रा करनी होगी तो पहले कोर्ट से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो दूसरा पक्ष जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन दे सकता है। इस दौरान सुनवाई में वकीलों ने बयानबाजी पर रोक को लेकर भी कोर्ट से स्पष्ट निर्देश मांगे, जिस पर कोर्ट ने सख्ती बरतने की बात कही।


चार्जशीट और कानूनी प्रक्रिया समझिए
आपराधिक मामलों में चार्जशीट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है, जिसमें एफआईआर से लेकर जांच पूरी होने तक की पूरी जानकारी शामिल रहती है। यदि आरोपी जेल में होता है तो पुलिस को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है, अन्यथा कोर्ट जवाब मांग सकता है। वहीं, अगर आरोपी गिरफ्तार नहीं है तो पुलिस को जांच के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल सकता है, लेकिन इसके लिए कारण बताना जरूरी होता है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही कोर्ट तय करता है कि किन आरोपों पर मुकदमा चलेगा और आगे की सुनवाई कैसे होगी। यही प्रक्रिया इस मामले में भी आगे लागू होगी।


मामले की पृष्ठभूमि और आगे की राह
यह पूरा मामला यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने फरवरी में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने पहले ही गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अंतिम आदेश में जमानत मिलने के बाद शंकराचार्य को राहत मिली है। हालांकि, पुलिस जांच जारी रहेगी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही मामले की दिशा तय होगी।


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