वाराणसी में महिला अपराध के चौंकाने वाले आंकड़े, रोज पांच महिलाओं के साथ हिंसा, हर 15 दिन में दुष्कर्म

Curated By: shivnowup | Hindi Now Uttar Pradesh • 08 Jan 2026, 04:29 pm
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कमिश्नरेट क्षेत्र में महिला अपराध की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एक साल में 1686 मामले दर्ज हुए, जिनमें दुष्कर्म, पॉक्सो, छेड़खानी और घरेलू हिंसा शामिल हैं। औसतन हर दिन पांच महिलाएं हिंसा का शिकार हुईं, जबकि सजा की दर बेहद कम रही।

महिला अपराध की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई को लेकर कमिश्नरेट पुलिस के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। बीते एक साल में अलग-अलग थानों में महिलाओं से जुड़े कुल 1686 अपराध दर्ज किए गए। इन मामलों में घरेलू हिंसा, मारपीट, उत्पीड़न, छेड़खानी, पॉक्सो और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, औसतन हर दिन पांच महिलाएं किसी न किसी रूप में हिंसा का शिकार हुईं। यह आंकड़ा महिला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


दुष्कर्म और पॉक्सो के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, साल भर में दुष्कर्म के 27 मामले सामने आए, यानी औसतन हर 15 दिन में एक महिला के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक 284 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हो चुकी हैं। हालांकि पुलिस का दावा है कि वर्ष 2025 में दुष्कर्म के मामलों में पिछले साल की तुलना में कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट से जुड़े अपराधों का ग्राफ लगातार ऊंचा बना हुआ है। एक साल में ऐसे 910 मामले दर्ज किए गए, जिनमें विवेचना के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। औसतन प्रतिदिन दो मामले छेड़खानी या पॉक्सो से जुड़े सामने आए।


घरेलू हिंसा और अभियुक्तों पर कार्रवाई
महिलाओं के खिलाफ अपराध सिर्फ सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि घरों के भीतर भी बड़ी संख्या में महिलाएं प्रताड़ना का शिकार हुईं। घरेलू हिंसा से जुड़े 617 मामले मिशन शक्ति केंद्रों पर पहुंचे। इनमें से कुछ मामलों का निस्तारण काउंसिलिंग के जरिए किया गया, कुछ को कानूनी सहायता दी गई, जबकि 92 पीड़ित महिलाओं को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई। विवेचना के दौरान 1054 अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिसमें 381 मामलों में फाइनल रिपोर्ट दाखिल हुई। इसके अलावा 106 आरोपियों पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि कुछ मामलों में समझौता, काउंसिलिंग या प्रारंभिक जांच के बाद आगे की कार्रवाई संभव नहीं हो सकी।


सजा की दर कम, 565 अपहृत महिलाएं बरामद
पुलिस जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद वर्ष 2025 में महिला अपराध से जुड़े सिर्फ 67 मामलों में ही सजा हो सकी। इनमें दुष्कर्म के दो, पॉक्सो के 52 और दहेज हत्या के 11 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। शेष मामले अभी न्यायालय में लंबित हैं या विवेचना की प्रक्रिया में हैं। वहीं, बीते दो वर्षों में पुलिस ने 565 अपहृत महिलाओं और बालिकाओं को बरामद किया। पुलिस के मुताबिक, अधिकांश अपहरण के मामले बहला-फुसलाकर ले जाने, सोशल मीडिया के जरिए संपर्क या जान-पहचान और रिश्तेदारी के दायरे में बने संबंधों से जुड़े थे। कुछ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि कई अब भी फरार हैं।


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