बुढ़िया के बाल खाने से बच्चे हो सकते हैं कैंसर का शिकार, इस राज्य ने लगाया कॉटन कैंडी पर बैन

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 30 Nov 2025, 12:02 pm
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बुढ़िया के बाल यानी कॉटन कैंडी खाना बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आइए ये रिपोर्ट पढ़ते हैं।

बच्चों की पसंदीदा कॉटन कैंडी यानी बुढ़िया के बाल में खतरनाक केमिकल युक्त रंगों के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से लिए गए सैंपल की जांच में पाया गया है कि इसमें ऐसे सिंथेटिक रंग मिलाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हैं और लंबे समय में कैंसर का कारण भी बन सकते हैं। केवल कॉटन कैंडी ही नहीं, बल्कि लाल मिर्च पाउडर, चाऊमीन और समोसा-कचौरी के साथ परोसी जाने वाली लाल चटनी के सैंपल भी असुरक्षित पाए गए हैं। इन सभी उत्पादों में खतरनाक रंगों का उपयोग किया जाता है, जिनका सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद जोखिम भरा है।


लखनऊ में हुई जांच में फेल हुआ सैंपल, खाने योग्य नहीं

करीब एक महीने पहले साहिबाबाद क्षेत्र से कॉटन कैंडी का सैंपल लेकर लखनऊ स्थित लैब में जांच के लिए भेजा गया था। दो दिन पहले आई रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि कैंडी में उपयोग किए गए रंग मानव उपभोग के योग्य नहीं हैं। खाद्य प्रभारी सहायक आयुक्त आशुतोष राय ने बताया कि इसमें मानकों के विपरीत सिंथेटिक रंग का प्रयोग किया गया था, जो सेहत पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में शादी-पार्टियों समेत कई आयोजनों में कॉटन कैंडी के स्टॉल लगाए जा रहे हैं, लेकिन अधिकांश विक्रेता किसी भी प्रकार के गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।


लाल मिर्च पाउडर में प्रतिबंधित खतरनाक कलर मिला

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा वैशाली क्षेत्र से लिए गए लाल मिर्च पाउडर के सैंपल में प्रतिबंधित सूडान-2 रंग मिला, जो अत्यंत खतरनाक माना जाता है और कैंसर का कारण बन सकता है। इसी क्षेत्र से लिए गए चाऊमीन के सैंपल में भी मेटेलिक यलो सिंथेटिक रंग पाया गया, जो खाद्य सामग्री में मिलने की अनुमति नहीं है। विजयनगर क्षेत्र की लाल चटनी में भी सिंथेटिक रंग की मात्रा मानक से कहीं अधिक पाई गई। वहीं, अरहर और चने की दाल के नमूनों में कीड़े मिलने की पुष्टि हुई।


सिंथेटिक रंग और सूडान-2 कैंसरस, तमिलनाडु में बैन

विशेषज्ञों के मुताबिक सिंथेटिक रंग और सूडान-2 जैसे केमिकल शरीर में धीरे-धीरे जमा होते जाते हैं और समय के साथ कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं। अधिक मात्रा में इनका सेवन किडनी और लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। कॉटन कैंडी में इनका अत्यधिक इस्तेमाल होने की वजह से तमिलनाडु सरकार पहले ही इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा चुकी है।


सिंथेटिक और मेटेलिक रंग पूरी तरह प्रतिबंधित

फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर प्रेमचंद के अनुसार, खाद्य पदार्थों में रंग मिलाने के लिए स्पष्ट नियम हैं। सिंथेटिक और मेटेलिक रंग पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। जिन रंगों की अनुमति है, वे भी केवल प्रति मिलियन 100 पीडीए की सीमा तक ही उपयोग किए जा सकते हैं। मानकों के अनुसार टोमैटो कैचअप में किसी भी प्रकार के रंग के प्रयोग की अनुमति नहीं है।


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