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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 17 Jan 2026, 04:33 pm
मुरादाबाद के कांठ क्षेत्र के छजलैट गांव में ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई गई अंगीठी एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई। अंगीठी के धुएं से दम घुटने के कारण चार वर्षीय आहिल और तीन वर्षीय आयरा की मौत हो गई, जबकि दंपती समेत तीन अन्य की हालत बिगड़ गई। इस हृदयविदारक घटना से पूरे गांव में मातम पसरा है और हर आंख नम है। शुक्रवार सुबह जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तब इस दर्दनाक हादसे का खुलासा हुआ।
बंद कमरे में बुझ गईं दो मासूम जिंदगियां
परिजनों के अनुसार, छजलैट निवासी जावेद अपनी पत्नी शाहिस्ता और बच्चों के साथ रात में ठंड से बचने के लिए कोयले की अंगीठी जलाकर कमरे में सोए थे। आमतौर पर वह धुएं के निकास के लिए दरवाजा थोड़ा खुला रखते थे, लेकिन उस रात दरवाजा पूरी तरह बंद था। खिड़की और रोशनदान भी बंद होने के कारण धुआं बाहर नहीं निकल सका और कमरे में जहरीली गैस भर गई। पूरी रात अंगीठी जलती रही और परिजन अनजान रहे। सुबह करीब नौ बजे तक जब कोई हलचल नहीं हुई तो परिजन परेशान हो गए। दरवाजा खुलने पर कमरे के अंदर का मंजर देख हर कोई सन्न रह गया।
इलाज के दौरान दो बच्चों ने तोड़ा दम
कमरे में जावेद, उनकी पत्नी शाहिस्ता और तीनों बच्चे बेहोशी की हालत में पड़े मिले। आनन-फानन में सभी को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने आहिल और आयरा को मृत घोषित कर दिया। जावेद, उनकी पत्नी और बड़ा बेटा शिफान का इलाज जारी है। शाहिस्ता की हालत दोबारा बिगड़ने पर उन्हें मुरादाबाद से हायर सेंटर मेरठ रेफर किया गया है। वह अभी भी बेहोश हैं और उन्हें यह तक नहीं पता कि उन्होंने अपने दो मासूम बच्चों को खो दिया है।
पहले भी छिन चुका है परिवार का सहारा
यह हादसा जावेद के परिवार के लिए और भी ज्यादा दर्दनाक है, क्योंकि तीन साल पहले दिल की बीमारी से उनके बेटे तैमूर की भी मौत हो चुकी है। चार बच्चों में अब केवल शिफान ही बचा है। एक के बाद एक तीन बच्चों को खोने से इस परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में सुबह से शाम तक लोगों का तांता लगा रहा, हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचा।
पोस्टमार्टम नहीं, सुरक्षा को लेकर चेतावनी
पुलिस ने परिजनों के अनुरोध पर बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम नहीं कराया। शाम को दोनों मासूमों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। पुलिस और डॉक्टरों ने मौत का कारण अंगीठी के धुएं से दम घुटना बताया है। विशेषज्ञों ने ठंड के मौसम में बंद कमरों में अंगीठी, ब्लोअर या कोयले का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। इसके बावजूद लापरवाही के चलते ऐसे हादसे लगातार सामने आ रहे हैं, जो कई परिवारों को उजाड़ रहे हैं।