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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 27 Mar 2026, 10:37 am
बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच Government of India ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपए से घटकर 3 रुपए प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह खत्म कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद आम लोगों को राहत देना और तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव को कम करना है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने का खतरा बढ़ गया था, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया गया।
क्यों जरूरी हुई यह कटौती और क्या होगा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर Iran और Israel के बीच टकराव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी आई है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ा है। तेल कंपनियां महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीद रही थीं, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें सीमित रखी गई थीं, जिससे कंपनियों को नुकसान हो रहा था। सरकार की इस कटौती से तेल कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी और कीमतों में अचानक उछाल को रोका जा सकेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत 10 रुपए कम हो जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां इस राहत का इस्तेमाल अपने घाटे की भरपाई में कर सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को सीमित फायदा मिलेगा।
आम जनता को कितना फायदा और आगे क्या संकेत
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां पेट्रोल-डीजल के रेट अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अपने मार्जिन के आधार पर तय करती हैं। ऐसे में टैक्स घटने के बावजूद तुरंत बड़ी राहत मिलना मुश्किल है। अगर राज्य सरकारें भी वैट (VAT) कम करती हैं, तब उपभोक्ताओं को 2 से 5 रुपए तक की सीधी राहत मिल सकती है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौजूदा वैश्विक हालात को गंभीर बताते हुए राज्यों के साथ समन्वय बनाकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर ईंधन के दामों में और बदलाव संभव है।