शाह बोले - ममता के गुंडों को उल्टा लटकाकर मारेंगे, मैं चेतावनी दे रहा हूं , 29 तारीख को घर से बाहर न निकलें

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 24 Apr 2026, 10:56 am
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बंगाल दौरे में पीएम मोदी की नाव सवारी के बीच नेताओं के तीखे बयानों से चुनावी माहौल गरमाया, आयोग पर भी उठे सवाल।

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हुगली नदी में नाव की सवारी कर राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों संदेश दिए। इस दौरान उन्होंने खुद कैमरा लेकर तस्वीरें खींचीं और नाविकों से बातचीत भी की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि गंगा हर बंगाली के दिल में बसती है और यह राज्य की आत्मा से जुड़ी हुई है। उन्होंने नदी किनारे समय बिताकर मां गंगा के प्रति अपनी आस्था भी जताई। वहीं, उनका यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब राज्य में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है और सभी दल एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं।


नेताओं के बयानों से बढ़ा सियासी तापमान
चुनावी माहौल के बीच नेताओं के बयान भी लगातार सुर्खियों में हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने आरामबाग की रैली में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कड़ा संदेश दिया और मतदान के दिन गड़बड़ी करने वालों को चेतावनी दी। वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी कहा कि सत्ता में आने के बाद हमले करने वालों को जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें हराने की कोशिश करने वाले सफल नहीं होंगे और वह अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका जीवन बंगाल के लिए समर्पित है और वे राजनीतिक दबाव में आने वाली नहीं हैं। इन बयानों से साफ है कि चुनावी मुकाबला बेहद आक्रामक हो चुका है।


चुनाव आयोग के फैसलों और विपक्ष के आरोपों पर बहस
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आयोग ने मतदान प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें पोलिंग बूथ के कैमरों से डेटा निकालने के नियम सख्त किए गए हैं। वहीं कांग्रेस ने आयोग पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि कुछ मामलों में आयोग का रवैया संतुलित नहीं दिख रहा और जवाब देने के लिए दिया गया समय भी कम है। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बयानों को आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। कुल मिलाकर बंगाल चुनाव अब सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी बड़ा मुद्दा बन गया है।


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