आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा थामेंगे बीजेपी का दामन, दो और नेताओं ने छोड़ा AAP का साथ, कहा- पार्टी अपने लक्ष्य से भटकी

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 24 Apr 2026, 04:04 pm
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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने दो-तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में शामिल होने की बात कही। पार्टी पर सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया है, जिससे राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। इस घोषणा के साथ ही सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राघव चड्ढा ने अपने फैसले को पार्टी के मूल सिद्धांतों से भटकाव से जोड़ते हुए इसे देशहित में उठाया गया कदम बताया।


“पार्टी अपने मूल्यों से भटक गई”, राघव का बड़ा आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से खड़ा किया, वही अब अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से दूर हो गई है। उनका आरोप है कि पार्टी अब देशहित के बजाय निजी हितों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें यह महसूस हो रहा था कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। इसी वजह से उन्होंने यह फैसला लिया और खुद को पार्टी से अलग कर लिया। उन्होंने यह भी कहा कि अब वह जनता के और करीब जाकर काम करना चाहते हैं।


उपनेता पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी नाराजगी
राघव चड्ढा को 2 अप्रैल को AAP ने राज्यसभा सांसदों के उपनेता पद से हटा दिया था। इसके बाद पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर उनके बोलने के समय पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी। उनकी जगह अशोक मित्तल को उपनेता बनाया गया। इस फैसले के बाद राघव ने एक वीडियो जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और कहा था कि संसद में जनता के मुद्दे उठाना अपराध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी खामोशी को कमजोरी न समझा जाए।


AAP नेताओं का पलटवार, लगाए कई आरोप
राघव चड्ढा के बयान के बाद AAP के कई नेता उनके खिलाफ खुलकर सामने आए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि राघव पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि जब पार्टी को उनकी जरूरत थी, तब वह विदेश में थे और संसद में भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय नहीं दिखे। पार्टी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने कई अहम प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया और वॉकआउट के दौरान भी पार्टी का साथ नहीं दिया।


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