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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 21 Apr 2026, 09:04 am
राजस्थान के बाड़मेर के पास बालोतरा (पचपदरा) स्थित Hindustan Petroleum Corporation Limited की रिफाइनरी में 20 अप्रैल दोपहर करीब 2 बजे भीषण आग लग गई। यह हादसा ऐसे वक्त हुआ जब पीएम नरेंद्र मोदी मंगलवार को इसका उद्घाटन करने वाले थे। आग लगने के बाद उनका दौरा स्थगित कर दिया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट में लगी, जहां ट्रायल रन पूरा हो चुका था। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दिया है।
रिफाइनरी का सपना: 2004 से शुरू हुई लंबी कहानी
इस प्रोजेक्ट की नींव 2004 में बाड़मेर के मंगला ऑयल फील्ड की खोज के साथ रखी गई थी। 2009 में यहां उत्पादन शुरू हुआ, जिसके बाद राजस्थान में लोकल रिफाइनिंग की जरूरत महसूस की गई। 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने पचपदरा में इसका शिलान्यास किया था, उस समय अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपए तय की गई थी और इसे 2017-18 तक पूरा करने का लक्ष्य था। लेकिन राजनीतिक बदलाव, नीतिगत अड़चनें और प्रशासनिक देरी के कारण यह सपना लगातार टलता गया और समयसीमा पीछे खिसकती चली गई।
राजनीति, रिव्यू और देरी ने बढ़ाई लागत
सरकार बदलने के बाद Vasundhara Raje के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट को रिव्यू और री-नेगोशिएशन में डाल दिया गया। सब्सिडी, टैक्स बेनिफिट और रिटर्न को लेकर सवाल उठे, जिससे यह प्रोजेक्ट करीब पांच साल तक ठंडे बस्ते में रहा। इसके बाद 2018 में एक बार फिर पीएम मोदी ने इसका काम शुरू कराया, लेकिन तब तक इसकी लागत बढ़कर 43 हजार करोड़ रुपए हो चुकी थी। इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और तकनीकी बदलावों के चलते काम की रफ्तार धीमी रही। धीरे-धीरे लागत बढ़ते-बढ़ते 79 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
कोविड और तकनीकी चुनौतियों से धीमा पड़ा काम
2020 और 2021 के दौरान कोविड महामारी ने इस प्रोजेक्ट की रफ्तार को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। निर्माण कार्य लंबे समय तक ठप रहा। इसके अलावा डिजाइन में बदलाव, तकनीकी सुधार और नई स्वीकृतियों की प्रक्रिया ने भी समय लिया। 2023 में नई सरकार बनने के बाद प्रोजेक्ट को फिर से गति देने की कोशिश की गई और 2026 तक इसे शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया। बताया जा रहा था कि उद्घाटन से ठीक पहले तक करीब 92% काम पूरा हो चुका था, जिससे उम्मीद थी कि जल्द ही यह रिफाइनरी पूरी तरह चालू हो जाएगी।
आग से आर्थिक नुकसान और उत्पादन पर असर
जिस यूनिट में आग लगी है, वही रिफाइनरी का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। इसी यूनिट में कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। ऐसे में यहां हुई क्षति से उत्पादन शुरू होने में देरी तय मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हादसे के बाद रिपेयरिंग और डैमेज असेसमेंट में 1 से 6 महीने का समय लग सकता है। अगर जुलाई 2026 से उत्पादन शुरू होता, तो हर महीने 50 से 80 हजार करोड़ रुपए का संभावित राजस्व मिलता। अब हर महीने की देरी सीधे आर्थिक नुकसान में बदल जाएगी।
जांच के बाद ही साफ होगा आग का असली कारण
फिलहाल इस बड़े हादसे को लेकर कई तकनीकी सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जानना जरूरी होगा कि यूनिट किस कंपनी ने सप्लाई की थी, उसका टेक्निकल ऑडिट किसने किया था और क्या सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। जब तक इन सभी पहलुओं की गहन जांच नहीं हो जाती, तब तक आग के असली कारण और नुकसान का सटीक आकलन करना मुश्किल है। हालांकि इतना तय है कि रिफाइनरी के ‘दिल’ में लगी इस आग ने न सिर्फ प्रोजेक्ट की टाइमलाइन को पीछे धकेला है, बल्कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाला है।