यूपी विधानसभा में ये जरूरी विधेयक पास, घरौनी से जुड़ा है मामला, जानकर खुश हो जाएंगे आप!

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 23 Dec 2025, 06:45 pm
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यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक-2025 पास हो गया। इससे गांवों में घरौनी को आधिकारिक दस्तावेज का दर्जा मिलेगा और खरीद-बिक्री, नामांतरण व वरासत की प्रक्रिया आसान होगी। सत्र के दौरान अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर अध्यक्ष ने नाराजग

यूपी विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में विधानसभा ने उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक-2025 को मंजूरी दे दी। यह विधेयक ग्रामीण इलाकों में संपत्ति से जुड़े मामलों को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इसके लागू होने के बाद गांवों में घरौनी को आधिकारिक दस्तावेज का दर्जा मिलेगा, जिससे मकान और आबादी की जमीन से जुड़े स्वामित्व अधिकार सुरक्षित होंगे। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खरीद, बिक्री और नामांतरण जैसी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में ज्यादा आसान और विवादरहित होंगी।


विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में किसी भी संबंधित विभाग के अधिकारी की मौजूदगी नहीं रही। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के समय विभागीय अधिकारियों का मौजूद रहना जरूरी है, ताकि सदस्यों के सवालों का जवाब दिया जा सके।

घरौनी से आसान होगा नामांतरण और सुधार
ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक-2025 के तहत अब घरौनी को ही मालिकाना हक का प्रमुख प्रमाण माना जाएगा। वरासत, विक्रय या अन्य कारणों से नाम बदलने और रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया को भी सरल कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों को तहसील और दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। लंबे समय से गांवों में आबादी की जमीन को लेकर चल रहे विवादों में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का दावा है कि इस कानून से गांवों में संपत्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

दस विधेयक बने कानून
इससे पहले सोमवार को विधानसभा में दस विधेयकों के कानून बनने की सूचना दी गई। प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे ने सदन को बताया कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मंजूरी के बाद श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास विधेयक समेत दस विधेयक अधिनियम बन गए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास विधेयक अगस्त में पारित हुआ था, जिसे राज्यपाल की स्वीकृति के बाद कानून का रूप मिला। इनके अलावा उप्र निरसन विधेयक 2025, उप्र माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2025, उप्र निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2025, उप्र राज्य लोक सेवा आयोग (प्रक्रिया का विनियमन) संशोधन विधेयक 2025, उप्र लोक अभिलेख विधेयक 2025, उप्र मोटर यान कराधान संशोधन विधेयक 2025, उप्र राज्य विधानमंडल सदस्य तथा मंत्री सुख-सुविधा विधि संशोधन विधेयक 2025 और कारखाना (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2024 भी कानून बन गए हैं।


आठ अध्यादेश पटल पर रखे गए
सत्र के दौरान उप्र पेंशन की हकदारी तथा विधिमान्यकरण अध्यादेश 2025, उप्र निजी विश्वविद्यालय से जुड़े चार संशोधन अध्यादेश, उप्र नगर निगम संशोधन अध्यादेश 2025, उप्र सुगम्य व्यापार संशोधन अध्यादेश 2025, उप्र दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान संशोधन अध्यादेश 2025 और उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग संशोधन अध्यादेश 2025 भी सदन के पटल पर रखे गए।

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