झांसी मेडिकल कॉलेज में एआई वेंटिलेटर, खुद ही समझ लेता है मरीज की परेशानी

Curated By: shivnowup | Hindi Now Uttar Pradesh • 15 Jan 2026, 04:17 pm
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एआई संचालित वेंटिलेटर की सुविधा शुरू होने जा रही है। यह तकनीक गंभीर मरीजों के इलाज को सुरक्षित और प्रभावी बनाएगी, जिससे आईसीयू सेवाओं में बड़ा सुधार होगा।

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के इलाज को और अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित अत्याधुनिक वेंटिलेटर की सुविधा शुरू होने जा रही है। यह वेंटिलेटर मरीज के शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को खुद नियंत्रित करेगा और सांसों की गति समेत अन्य जरूरी पैरामीटर का लगातार विश्लेषण करता रहेगा। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शासन से ऐसे छह एआई आधारित वेंटिलेटर की मांग की थी, जिसे मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से दो वेंटिलेटर कॉलेज को प्राप्त हो चुके हैं, जबकि शेष चार फरवरी के अंत तक मिलने की उम्मीद है। सभी वेंटिलेटर आने के बाद एक साथ इन्हें इंस्टॉल किया जाएगा, जिससे आईसीयू सेवाओं को और मजबूती मिलेगी।


आईसीयू मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई संचालित वेंटिलेटर से आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों के इलाज में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह तकनीक मरीज की स्थिति को खुद समझकर ऑक्सीजन सप्लाई और प्रेशर को नियंत्रित करती है। इससे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर निर्भरता कुछ हद तक कम होगी और मानवीय भूल की संभावना भी घटेगी। अभी तक बच्चों और बड़ों के लिए अलग-अलग वेंटिलेटर का इस्तेमाल होता है और ऑक्सीजन का दबाव चिकित्सक को मैन्युअली तय करना पड़ता है। लेकिन एआई वेंटिलेटर नवजात से लेकर बुजुर्ग मरीज तक, सभी के लिए समान रूप से उपयोगी होंगे। सेंसर आधारित यह सिस्टम मरीज की तबीयत को भांपकर सटीक निर्णय लेता है, जिससे इलाज अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो सकेगा।


अलार्म और दवा सप्लाई की भी सुविधा
मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंदेल ने बताया कि मरीज को भर्ती करते समय जैसे ही वेंटिलेटर में उसकी उम्र, वजन और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज की जाती है, वैसे ही वेंटिलेटर का मोड अपने आप बदल जाता है। इससे ऑक्सीजन प्रेशर को बार-बार एडजस्ट करने की जरूरत नहीं रहती। अगर मरीज की हालत अचानक बिगड़ती है तो वेंटिलेटर से अलार्म बजेगा, जिससे डॉक्टर तुरंत मरीज तक पहुंच सकेंगे। खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर इसी सिस्टम के जरिए जीवन रक्षक दवाएं भी मरीज को दी जा सकेंगी। इससे समय पर उपचार संभव होगा और गंभीर मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी।


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