अखलाक लिंचिंग केस, आ गया कोर्ट का फैसला, यूपी सरकार को तगड़ा झटका, जानें क्या है पूरा मामला!

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 23 Dec 2025, 05:51 pm
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अखलाक लिंचिंग केस में मुकदमा वापस लेने की यूपी सरकार की याचिका सूरजपुर कोर्ट ने खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि अर्जी में कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है और ट्रायल जारी रहेगा।

गौतमबुद्ध नगर के दादरी के बिसहाड़ा गांव में अखलाक लिंचिंग केस में आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने से जुड़ी उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मंगलवार को सूरजपुर कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने केस वापसी का पक्ष रखा, लेकिन अदालत उसकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि मुकदमा वापस लेने के लिए दायर की गई अर्जी में कोई ठोस और वैध कानूनी आधार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आरोपियों के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी और मामले में किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।


कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी, 2026 तय की है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि मामले की नियमित सुनवाई की जाए, ताकि ट्रायल में अनावश्यक देरी न हो। अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।


सरकार की दलीलों को कोर्ट ने माना आधारहीन

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि मुकदमा वापस लेने से सामाजिक सौहार्द बहाल होगा। हालांकि कोर्ट ने कहा कि केवल सामाजिक सौहार्द का तर्क देकर किसी गंभीर आपराधिक मामले में अभियोजन वापस नहीं लिया जा सकता। अदालत के मुताबिक, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-321 के तहत भी अभियोजन वापसी के लिए मजबूत और ठोस कारणों का होना जरूरी है, जो इस मामले में सामने नहीं आए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान है और किसी भी आरोपी को केवल सामान्य तर्कों के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। इस दौरान अखलाक के परिवार के वकील यूसुफ सैफी और अंदलीब नकवी ने कहा कि कोर्ट ने सरकार की याचिका को निरस्त कर न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है।


गवाहों की सुरक्षा और रोज सुनवाई के निर्देश

कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिए हैं कि वह आगे गवाहों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया तेज करे। इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर और डीसीपी ग्रेटर नोएडा को आदेश दिया गया है कि यदि गवाहों को किसी भी तरह की सुरक्षा की आवश्यकता हो, तो उन्हें तुरंत सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। सुनवाई के दौरान सीपीआईएम नेता वृंदा करात भी कोर्ट में मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लगाई गई अर्जी पूरी तरह आधारहीन थी, जिसे अदालत ने भी स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे आगे भी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहेंगी और उन्हें न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी।


2015 की घटना, जिसने देश को झकझोर दिया था

यह मामला 28 सितंबर, 2015 की रात का है, जब गांव बिसाहड़ा में अखलाक के घर में गोमांस होने की अफवाह फैला दी गई थी। गुस्साई भीड़ अखलाक के घर पहुंची और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस हमले में उसका बेटा दानिश गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे। मामले में 10 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी। सरकार ने अगस्त 2025 में मुकदमा वापस लेने का फैसला किया था और संयुक्त निदेशक अभियोजन के जरिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कराई गई थी, लेकिन अब कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि अखलाक लिंचिंग केस का ट्रायल आगे जारी रहेगा।

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