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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 23 Dec 2025, 05:37 pm
उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने सेंगर की सजा को उसकी अपील पर अंतिम सुनवाई पूरी होने तक के लिए सस्पेंड कर दिया है। कोर्ट ने उसे 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दी है। हालांकि अदालत ने साफ किया है कि यह राहत सीमित है और तय शर्तों के उल्लंघन पर जमानत तत्काल रद्द की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने सेंगर पर चार अहम शर्तें लगाई हैं। उसे पीड़िता से कम से कम पांच किलोमीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। हर सोमवार को संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी देनी होगी। इसके अलावा पासपोर्ट संबंधित प्राधिकरण के पास जमा कराना होगा, ताकि वह देश छोड़कर न जा सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर उसकी जमानत स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
2017 का मामला, नाबालिग से रेप में मिली थी उम्रकैद
उन्नाव रेप केस साल 2017 में सामने आया था और पूरे देश में इसने जबरदस्त आक्रोश पैदा किया था। आरोप था कि कुलदीप सिंह सेंगर और उसके साथियों ने 17 साल की नाबालिग लड़की को अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी। लंबी सुनवाई के बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 20 दिसंबर 2019 को सेंगर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सेंगर को मृत्यु तक जेल में रहना होगा। इसके साथ ही उस पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते सेंगर ने जनता के भरोसे को तोड़ा है और उसके लिए किसी तरह की सहानुभूति का सवाल ही नहीं उठता। सजा के बाद कुलदीप सेंगर की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी और भाजपा ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली ट्रांसफर हुआ था केस
उन्नाव रेप केस की गंभीरता को देखते हुए अगस्त 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े चारों मुकदमों का ट्रायल उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि रोजाना सुनवाई हो और 45 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा किया जाए। उसी के तहत दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई को यह भी निर्देश दिया था कि पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाएं। इसमें परिवार की सहमति से पहचान बदलने और सुरक्षित आवास की व्यवस्था जैसे निर्देश शामिल थे। अब दिल्ली हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद सेंगर को जेल से बाहर आने का रास्ता मिला है, हालांकि उसकी अपील पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
राजनीतिक सफर भी रहा विवादों में
कुलदीप सिंह सेंगर उत्तर प्रदेश के चर्चित और विवादित नेताओं में गिना जाता रहा है। वह बसपा, सपा और फिर भाजपा में रहते हुए चार बार विधायक चुना गया और कभी चुनाव नहीं हारा। 2017 में भाजपा के टिकट पर उसने बांगरमऊ सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन रेप केस में दोषी ठहराए जाने के बाद उसका राजनीतिक करियर लगभग समाप्त हो गया।
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