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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 08 Apr 2026, 07:38 pm
पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को एक बार फिर सुनवाई नहीं हो सकी। लंच के बाद इस मामले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन अत्यधिक मामलों के कारण इसे नहीं सुना जा सका। अब इस पर अगली तारीख तय की जाएगी। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस Atul Sreedharan और जस्टिस Siddharth Nandan शामिल हैं, के समक्ष लंबित है। सुनवाई टलने से पंचायत चुनाव की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
समयसीमा पर कोर्ट ने पहले उठाए थे सवाल
इससे पहले 17 मार्च को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से कड़ा सवाल पूछा था कि पंचायत चुनाव तय समयसीमा के भीतर क्यों नहीं कराए जा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा था कि क्या आयोग संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाएगा या नहीं। याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की ओर से दाखिल याचिका में मांग की गई है कि पंचायत चुनाव के लिए विस्तृत और समयबद्ध कार्यक्रम कोर्ट के सामने पेश किया जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया में देरी न हो।
राज्य सरकार और आयोग के बीच जिम्मेदारी का मुद्दा
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, जो आयोग के परामर्श से तय होती है। वहीं याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 243E का हवाला देते हुए कहा कि पंचायत का कार्यकाल अधिकतम 5 साल ही हो सकता है, इसलिए समय पर चुनाव कराना जरूरी है। कोर्ट ने आयोग से यह भी पूछा था कि 19 फरवरी 2026 की अधिसूचना के आधार पर क्या वह 26 मई 2026 तक चुनाव कराने की स्थिति में है।
कार्यकाल खत्म होने की तारीख नजदीक, बढ़ी चिंता
दरअसल, यूपी में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में अप्रैल से जून के बीच चुनाव कराए जाने की योजना थी। हालांकि मतदाता सूची पुनरीक्षण और जनगणना जैसे कार्यों के चलते इसमें देरी की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक अमला इन दिनों अन्य कार्यों में व्यस्त है, जिससे चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई की तारीख पर टिकी है, जहां इस मुद्दे पर आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।