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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 29 Nov 2025, 03:31 pm
पूर्व सांसद अमर सिंह के परिवार पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में शुक्रवार को सपा नेता आजम खां की पेशी तय थी, लेकिन अदालत ले जाने से पहले ही जेल गेट पर अफरा-तफरी मच गई। जेल प्रशासन आजम को अदालत ले जाने के लिए बड़ा कैदी वाहन लेकर पहुंचा था। इसे देखकर आजम खां भड़क उठे और कहा कि मैं इस वाहन में नहीं बैठूंगा। मैं एक राजनीतिक कैदी हूं। मेरे लिए बोलेरो लाओ। हालांकि बाद में उनके बैक बोन में समस्या होने के कारण उन्हें अदालत नहीं लाया गया। उनकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही उनकी अदालत में पेशी कराई गई।
एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में आजम खां को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा। यह मामला 17 अक्टूबर 2018 से जुड़ा हुआ है, जब आजम खां ने जौहर यूनिवर्सिटी में एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में अमर सिंह और उनके परिवार के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद अमर सिंह ने इस बयान के विरोध में नोएडा से लखनऊ और फिर रामपुर तक रैली निकाली थी। उसी समय सरकार ने केस दर्ज कराने के आदेश दिए थे। मार्च 2020 में अमर सिंह ने लखनऊ में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया था कि आजम ने उन पर और उनकी 17 वर्षीय बेटियों पर तेजाब फेंकने की धमकी दी थी। बाद में केस रामपुर के अजीमनगर थाने स्थानांतरित हुआ।
मंगलवार को इस मामले में अंतिम बहस पूरी की गई थी और अदालत ने 28 नवंबर को फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आजम खां को अदालत ने राहत देते हुए बरी कर दिया। उनके वकील ने बताया कि धारा 153A, 153B, 295 और 506 के तहत लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके। अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह तो पेश किए, लेकिन पुलिस गवाही अधूरी रही। फैसला 66 पन्नों का है।
सुनवाई के दौरान आजम खां ने जेल प्रशासन के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अदालत से स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि जेल प्रशासन उनकी ‘मिलाई’ खत्म कराने की साजिश कर रहा है और उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। उनका आरोप था कि उन्हें सही दवाइयों की जगह लोकल और बिना कंपनी नाम वाली दवाइयां दी जा रही हैं। साथ ही बताया कि उनकी पत्नी, बड़े बेटे और रिश्तेदार अब्दुल्ला से मुलाकात के दौरान पर्ची पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कराकर मिलाई बंद कराने की कोशिश की गई। उन्होंने शिकायत की कि उन्हें ए-श्रेणी की सुविधाएं नहीं दी जा रहीं और फर्श पर सोने तक को मजबूर किया जा रहा है। अदालत ने इन आरोपों का संज्ञान लिया है।
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