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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 16 Jan 2026, 04:10 pm
जिले के इस्लामनगर थाना क्षेत्र के ग्राम ब्योर कासिमाबाद में शुक्रवार सुबह प्रभात फेरी निकालने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। रूट को लेकर शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प में बदल गई। ग्रामीणों का आरोप है कि भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी घायल हुए। करीब एक घंटे तक चले हंगामे से गांव में तनाव का माहौल बन गया। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन की निगरानी में प्रभात फेरी उसी रूट से निकाली गई, जिस पर विवाद था।
50 साल पुराने रूट को लेकर शुरू हुआ विवाद
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में प्रभात फेरी पिछले करीब 50 वर्षों से एक तय रूट से निकलती आ रही है। शुक्रवार सुबह माघ महीने की प्रभात फेरी निकाली जा रही थी, तभी पुलिस ने इसे विवादित रूट बताते हुए रोक दिया। ग्रामीणों का कहना है कि 2012 में तत्कालीन सपा सरकार के दौरान एक समुदाय विशेष की आपत्ति के बाद रूट बदलवाया गया था। अब सड़कें दुरुस्त होने के बाद हिंदू समुदाय के लोग पुराने रूट से फेरी निकालना चाहते थे। इसी को लेकर दूसरे समुदाय की ओर से पुलिस में शिकायत की गई। सुबह करीब पांच बजे पुलिस गांव पहुंची और फेरी रोकने की कोशिश की, जिससे ग्रामीण भड़क गए और बहस शुरू हो गई।
लाठीचार्ज का आरोप, महिलाएं और युवक घायल
ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह करीब आठ बजे हालात बेकाबू होते ही पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इससे भगदड़ मच गई और कई लोग जमीन पर गिर पड़े। महिलाओं और युवकों को चोटें आईं, जिन्हें उपचार के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर महिला पुलिस की तैनाती नहीं थी, इसके बावजूद महिलाओं पर लाठियां चलाई गईं। आरोप है कि सीओ स्तर से लाठीचार्ज का आदेश दिया गया। गांव के लोगों का दावा है कि इस घटना में करीब 50 लोग घायल हुए, जिनमें लगभग 10 महिलाएं शामिल हैं।
प्रशासन के दखल के बाद निकली प्रभात फेरी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिल्सी और उघैती थाने की पुलिस के साथ पीएसी को भी मौके पर बुलाया गया। एसडीएम बिसौली राशि कृष्णा, सीओ बिल्सी और एसपी देहात डॉ. हृदयेश कठेरिया मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया और स्थिति शांत करने की कोशिश की। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि प्रभात फेरी कई वर्षों से इसी रूट से निकलती रही है। इसके बाद प्रशासन की निगरानी में फेरी को सुरक्षित रूप से निकलवाया गया। फेरी पूरी होने के बाद भी ग्रामीण पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े रहे और थाना गेट पर नारेबाजी की। प्रशासन ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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