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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 23 Apr 2026, 11:54 am
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चारधाम यात्रा के पांचवें दिन बुधवार सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर कपाट विधिवत रूप से खोल दिए गए। कपाट खुलते ही सबसे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए। कपाट खुलने के समय मंदिर परिसर में करीब 2 हजार श्रद्धालु मौजूद थे, जबकि आज लगभग 7 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। छह महीने बाद शुरू हुए दर्शन के साथ ही श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला और पूरे धाम में भक्ति का माहौल छा गया।
अखंड ज्योति और घृत कंबल के साथ शुरू हुई पूजा परंपरा
कपाट खुलते ही सबसे पहले छह महीने से लगातार जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए गए, जिसे भगवान की सतत उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद भगवान बद्रीविशाल की मूर्ति से घृत कंबल हटाया गया। यह कंबल कपाट बंद होने के समय ओढ़ाया जाता है और पूरे शीतकाल में मूर्ति की रक्षा करता है। बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार, इस साल कंबल घी से लबालब मिला है, जिसे शुभ संकेत माना जा रहा है। मान्यता है कि यदि कंबल सही स्थिति में मिले तो आने वाला वर्ष मौसम, फसल और समृद्धि के लिहाज से अच्छा रहता है।
क्या है घृत कंबल, कैसे बनता है यह खास परंपरा
घृत कंबल की परंपरा बद्रीनाथ धाम की खास पहचान मानी जाती है। इसे माणा गांव की कुंवारी लड़कियां एक दिन उपवास रखकर तैयार करती हैं। ऊन से बने इस कंबल को बद्री गाय के शुद्ध घी में डुबोया जाता है और कपाट बंद होने से पहले भगवान की मूर्ति को इससे ढक दिया जाता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी और माइनस तापमान के बावजूद यह कंबल अपनी स्थिति बनाए रखता है। कपाट खुलने पर इसकी हालत देखकर पूरे साल के मौसम और खेती-बाड़ी के संकेत माने जाते हैं। यही वजह है कि श्रद्धालुओं के लिए यह परंपरा आस्था के साथ-साथ भविष्य के संकेत का भी प्रतीक बन चुकी है।
चारों धाम खुले, यात्रा में इस बार ज्यादा भीड़ की उम्मीद
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही अब उत्तराखंड के चारों धाम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह खुल गए हैं। इससे पहले गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को और केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोले गए थे। सरकार का दावा है कि इस बार यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाया गया है, जिससे पिछले साल के मुकाबले ज्यादा श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। 2025 में करीब 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम यात्रा की थी, जबकि इस साल अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण करा लिया है। धाम को करीब 18 क्विंटल फूलों से सजाया गया है, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक और उत्सव जैसा नजर आ रहा है।
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