बलिया में रेप केस की जांच से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां पीड़िता से चार्जशीट लगाने के बदले ‘अकेले में मिलने’ का प्रस्ताव देने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। मामले में क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक और उभांव थाना प्रभारी संजय शुक्ला को सस्पेंड कर दिया गया है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में हुआ मामले का खुलासा
पीड़िता ने पूरे घटनाक्रम की ऑडियो रिकॉर्डिंग डीआईजी आजमगढ़ को सौंपी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
पीड़िता के मुताबिक, उसने चार्जशीट की स्थिति जानने के लिए क्राइम इंस्पेक्टर को फोन किया था। इस दौरान इंस्पेक्टर ने कहा कि चार्जशीट उनके हाथ में है और अगर वह उनसे मिलती है तो वह तुरंत उसे आगे बढ़ा देंगे। बातचीत में उन्होंने मिलने के लिए दबाव बनाया और पैसों तक का ऑफर दिया। पीड़िता ने करीब 9 मिनट 40 सेकंड की बातचीत रिकॉर्ड कर ली, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है।
पीड़िता से मिलने का दबाव बनाकर चार्जशीट आगे बढ़ाने की बात
जांच में सामने आया कि यह मामला 3 फरवरी 2026 को दर्ज एक यौन शोषण केस से जुड़ा है, जिसमें वन दरोगा उग्रसेन जायसवाल पर आरोप लगाए गए थे। 21 फरवरी को एफआईआर दर्ज हुई और 24 फरवरी को आरोपी की गिरफ्तारी भी हो गई थी। इसके बाद चार्जशीट की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान यह पूरा मामला सामने आया।
डीआईजी के आदेश पर तत्काल कार्रवाई, आरोपी इंस्पेक्टर सस्पेंड
ऑडियो में साफ तौर पर सुना जा सकता है कि इंस्पेक्टर बार-बार पीड़िता पर मिलने का दबाव बना रहा है और कह रहा है कि “सबकुछ मेरे हाथ में है।” वहीं पीड़िता लगातार चार्जशीट के बारे में पूछती रही। इस बातचीत के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
डीआईजी स्तर पर मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल दोनों अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। अब पूरे मामले की विभागीय जांच की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
यह है पूरी ऑडियो रिकॉर्डिग में बातचीत
क्राइम इंस्पेक्टर: मैं तो यहां नहीं हूं।
पीड़िता: अच्छा।
क्राइम इंस्पेक्टर: हूं।
पीड़िता: हम तो इसलिए पूछे कि आप कहां हैं?
क्राइम इंस्पेक्टर: बलिया में हूं।
पीड़िता: क्या हुआ चार्जशीट का सर? आपने कुछ बताया नहीं।
क्राइम इंस्पेक्टर: जब तक तू मुझसे नहीं मिलेगी, तब तक क्या बताऊंगा… मुझे भी जेल भिजवा दे।
पीड़िता: क्या?
क्राइम इंस्पेक्टर: मुझे जेल भिजवा दे न।
पीड़िता: हम क्या किए हैं सर?
क्राइम इंस्पेक्टर: यह बता, तू मुझसे मिल सकती है?
पीड़िता: नहीं, अभी तो हम घर पर हैं सर।
क्राइम इंस्पेक्टर: तो कहां रुकने का विचार बनाऊं, यह बताओ?
पीड़िता: अब हम यह कैसे बताएं सर?
क्राइम इंस्पेक्टर: यह तो कोई बात नहीं होती दोस्त।
पीड़िता: ठीक है सर, पर हम यह कैसे बताएं? मेरे पास कोई सुविधा नहीं है।
क्राइम इंस्पेक्टर: हमारे तरफ से सुविधा यहां से वहां कहीं भी हो सकती है।
पीड़िता: मैं समझी नहीं सर।
क्राइम इंस्पेक्टर: मैं कह रहा हूं, 2, 4 या 10 जो भी लगेगा मैं दे दूंगा।
पीड़िता: अच्छा सर।
क्राइम इंस्पेक्टर: उम्मीद है आप मुझे मिलोगी।
पीड़िता: ठीक है सर, पहले यह बताइए कि दरोगा वाली चार्जशीट में क्या करें?
क्राइम इंस्पेक्टर: मैं इस चार्जशीट को 2 सेकेंड में एक फोन पर फाइनल कर दूंगा।
पीड़िता: मतलब सबकुछ आपके हाथ में है।
क्राइम इंस्पेक्टर: मेरे बच्चे, मेरे बाबू… मैं इस वक्त क्राइम ब्रांच में हूं।
पीड़िता: जी।
क्राइम इंस्पेक्टर: अब बताओ कि मुझे किस टाइम, कहां और कैसे मिलोगी?
पीड़िता: थोड़ा समय दीजिए… जब तक नहीं मिलेंगे, आप चार्जशीट नहीं लगाएंगे?
क्राइम इंस्पेक्टर: सोच लो और समझ लो, जो तुमसे हो वो कर लेना।
पीड़िता: मतलब?
क्राइम इंस्पेक्टर: मेरी साइन से ही सबकुछ होना है।
पीड़िता: अभी तक संजय सर से रिक्वेस्ट कर रहे थे, अब आप से कर रहे हैं।
क्राइम इंस्पेक्टर: मेरी रिक्वेस्ट करने की जरूरत नहीं, मैं तुरंत फाइनल कर दूंगा।
पीड़िता: इसके लिए पहले हमें आपसे मिलना पड़ेगा?
क्राइम इंस्पेक्टर: मर्जी हो तेरी, मिल ले… नहीं तो नहीं।
पीड़िता: नहीं मिलेंगे सर तो चार्जशीट लगेगी नहीं?
क्राइम इंस्पेक्टर: जाने दो, फिर छोड़ो।
पीड़िता: यही शर्त संजय शुक्ला भी रखे थे, जब मुकदमा करवाना था।
क्राइम इंस्पेक्टर: अरे, अब यह बताओ कि मुझे किस टाइम, कब और कैसे मिलोगे?
पीड़िता: समय दीजिए थोड़ा सा…
क्राइम इंस्पेक्टर: कितने मिनट?
पीड़िता: सोचकर कॉल करते हैं।
क्राइम इंस्पेक्टर: ओके।