बिहार की सियासत में हलचल, क्या इसका असर 2027 के UP चुनाव पर पड़ेगा?

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 06 Mar 2026, 05:10 pm
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बिहार की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है और इसका असर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की चर्चा भी तेज हो गई है।

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों ने पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी चर्चाओं को गर्म कर दिया है। इसी के साथ यह सवाल भी उठने लगा है कि अगर बिहार में भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनता है तो क्या इसका असर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर सम्राट चौधरी जैसे किसी बड़े ओबीसी चेहरे को बिहार में मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो इसका संदेश सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर पूर्वी उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को 2027 के चुनावी गणित से जोड़कर देखा जा रहा है।


पूर्वी यूपी में क्यों अहम है यह समीकरण

पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिले सीधे बिहार से जुड़े हुए हैं। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, चंदौली और सोनभद्र जैसे जिलों में बिहार की राजनीति का प्रभाव भी देखने को मिलता है। इन जिलों में कुल मिलाकर लगभग 40 से अधिक विधानसभा सीटें आती हैं, जिनका चुनावी महत्व काफी बड़ा माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन इलाकों में कुशवाहा, मौर्य, सैनी और शाक्य जैसे ओबीसी समुदायों की मजबूत उपस्थिति है। अगर बिहार में इन समुदायों से जुड़ा कोई बड़ा चेहरा मुख्यमंत्री बनता है तो उसका संदेश उत्तर प्रदेश तक पहुंच सकता है।


2024 के बाद बदला राजनीतिक समीकरण

2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में अच्छी सफलता हासिल की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को कुछ इलाकों में चुनौती का सामना करना पड़ा। इस दौरान अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी बलिया, गाजीपुर और चंदौली जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया। ऐसे में भाजपा अब इन इलाकों में अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।


सामाजिक और राजनीतिक जुड़ाव का असर

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सामाजिक और आर्थिक रिश्ते भी काफी पुराने हैं। गोरखपुर और वाराणसी जैसे शहरों में बिहार से बड़ी संख्या में लोग इलाज, शिक्षा और व्यापार के लिए आते-जाते हैं। यही कारण है कि दोनों राज्यों की राजनीतिक हलचल अक्सर एक-दूसरे को प्रभावित करती दिखाई देती है।


जेडीयू के अंदर भी बढ़ी हलचल

इसी बीच Janata Dal (United) के अंदर भी हलचल देखने को मिली है। जैसे ही नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर सामने आई, पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। इस दौरान संजय झा और राजीव रंजन सिंह के खिलाफ नाराजगी की खबरें भी सामने आईं।


क्या होगा 2027 का सियासी असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बिहार में बड़ा राजनीतिक बदलाव होता है तो उसका असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या बिहार में संभावित बदलाव से योगी आदित्यनाथ को राजनीतिक फायदा मिलेगा या यह सिर्फ सियासी चर्चा तक ही सीमित रहेगा। फिलहाल बिहार की हलचल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस जरूर शुरू कर दी है। -आशीष शुक्ला, सह-संपादक की रिपोर्ट।


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