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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 06 Mar 2026, 05:39 pm
दुनिया की ऊर्जा राजनीति में इस वक्त नया मोड़ आ गया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। मगर विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई तनावपूर्ण स्थिति ने भारत समेत कई देशों की सप्लाई लाइन को चुनौती दी थी। इस बीच अमेरिका ने भारत को एक बड़ा अवसर दिया है, 30 दिनों की अस्थाई छूट, जो भारत की रणनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
30 दिन की छूट क्या है
यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन तेल कार्गो पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में हैं। इसका मतलब यह हुआ कि भारत इस दौरान रूस से फंसे हुए तेल को खरीद सकता है और अपने रिफाइनरी सिस्टम को बनाए रख सकता है। अगर अमेरिका ने यह छूट नहीं दी होती, तो भारत को तेल की कमी के कारण रिफाइनरी संचालन बंद करना पड़ सकता था। याद हो कि पिछले महीनों में अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर सख्त रुख अपनाया था। ट्रंप प्रशासन ने भारत को चेतावनी दी थी कि अगर रूस से आयात कम नहीं किया गया तो टैरिफ बढ़ाया जाएगा। भारत ने इस चेतावनी का पालन करते हुए आयात कम करने का वादा किया। लेकिन ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव ने वैश्विक सप्लाई को प्रभावित किया, जिससे अमेरिका को रणनीति बदलनी पड़ी और भारत को 30 दिन की छूट देनी पड़ी।
क्यों मिला भारत को यह फायदा
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका नहीं चाहता कि तेल की कीमतें अत्यधिक बढ़ें। कीमतों का उछाल सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के कई देश भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से अमेरिका ने भारत के लिए यह राहत पैकेज जारी किया। लेकिन इस फैसले में इजरायल का बड़ा हाथ भी है। इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर दबाव बनाया, जिससे होर्मुज में संकट बढ़ा और तेल की सप्लाई खतरे में पड़ सकती थी। नेतन्याहू ने अमेरिका को स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा जरूरतें गंभीर हैं और इसे नजरअंदाज करना वैश्विक रणनीति के लिए गलत होगा। भारत और इजरायल के बीच पुरानी दोस्ती और रक्षा, टेक्नोलॉजी तथा डिप्लोमेसी में करीबी ने भी इस छूट में अहम भूमिका निभाई। नेतन्याहू ने यह सुनिश्चित किया कि भारत अकेला न पड़े, वरना वह रूस और चीन की ओर झुक सकता है। इसके बाद अमेरिका ने भारत के लिए यह 30 दिन की अस्थाई छूट की घोषणा की।
भारत के लिए 30 दिन का महत्व
इस 30 दिन की छूट का भारत के लिए बहुत बड़ा महत्व है। देश रूस से फंसे हुए तेल कार्गो का उपयोग कर सकता है, अपने रिफाइनरी सिस्टम को सुचारू रख सकता है और जरूरत पड़ने पर एक्सपोर्ट भी कर सकता है। यह अवधि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और वैश्विक तेल बाजार में अपने हितों को सुरक्षित रखने का अवसर देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान भारत को रणनीतिक रूप से काम करना होगा। सही फैसले लेने से यह समय भारत की ऊर्जा निर्भरता को कम करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि यह 30 दिन अस्थाई हैं, लेकिन यह भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और वैश्विक रणनीति के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। अब यह देखना होगा कि भारत इस समय का इस्तेमाल कैसे करता है और क्या इसके बाद नई चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका, इजरायल और भारत का यह तालमेल वैश्विक ऊर्जा बाजार और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। पुतिन और रूस के लिए यह निश्चित रूप से एक चौंकाने वाला कदम है। वहीं भारत को अपनी रणनीति के अनुसार इस अवसर का फायदा उठाना होगा। -आशीष शुक्ला, सह-संपादक।
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