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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 02 May 2026, 10:51 am
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कहा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। फ्लोरिडा में शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने दावा किया कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई नहीं की होती, तो इजराइल, मिडिल ईस्ट और यूरोप बड़े खतरे में आ जाते। उन्होंने कहा कि “पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं जाने दिए जा सकते।” ट्रम्प ने यह भी बताया कि ईरान की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव को अमेरिका ने फिर खारिज कर दिया है, क्योंकि उसमें परमाणु मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान पहले एनरिच्ड यूरेनियम सौंपे और फिर बातचीत आगे बढ़े। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि पहले होर्मुज को खोला जाए, उसके बाद परमाणु मुद्दे पर चर्चा होगी। इस बीच अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह जल्दबाजी में जंग खत्म नहीं करेगा।
होर्मुज संकट और अमेरिकी नाकाबंदी से बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिकी नाकाबंदी के चलते जहाजों की आवाजाही में करीब 90 प्रतिशत गिरावट आई है। जहां पहले हर दिन लगभग 130 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या 10 से भी कम रह गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस नाकाबंदी से ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी तेल पर कब्जा कर लिया है और इसे “फायदेमंद सौदा” बताया। वहीं ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका युद्ध हार चुका है और ऐसे बयान उसकी हताशा दिखाते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “गटर के चूहे” तक कह दिया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है।
अमेरिका और ईरान दोनों में राजनीतिक दबाव बढ़ा
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका में भी राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। ट्रम्प ने कहा कि उन्हें सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि डेमोक्रेट नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं और इसे कानून से बचने की कोशिश बताया है। अमेरिकी संसद को भेजे गए पत्र में व्हाइट हाउस ने दावा किया कि युद्ध अब समाप्त हो चुका है, इसलिए 60 दिनों के भीतर मंजूरी लेने की शर्त लागू नहीं होती। दूसरी तरफ ईरान में भी अंदरूनी मतभेद सामने आने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर सरकार के भीतर सवाल उठ रहे हैं और उन पर IRGC के निर्देशों पर बातचीत चलाने के आरोप लग रहे हैं। वहीं अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका धमकी भरी भाषा बंद करे, तो ईरान फिर से बातचीत के लिए तैयार है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने खाड़ी देशों और इजराइल को 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों की मंजूरी भी दे दी है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
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