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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 23 Nov 2025, 02:53 pm
लखनऊ में आयोजित दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक मंच पर दिखाई दिए। जनेश्वर मिश्र पार्क में पहली बार आयोजित हो रहे इस समारोह का शुभारंभ दोनों ने दीप जलाकर किया। इसके बाद उन्होंने श्रीमद्भगवद गीता की पूजा-अर्चना की। संत ज्ञानानंद महाराज ने दोनों अतिथियों को गीता की प्रति स्मारक स्वरूप भेंट की। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई, जिसने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गीता के श्लोकों का संदर्भ देते हुए कहा कि अपने धर्म पर दृढ़ रहना श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि अपने धर्म में मर जाना अच्छा है, लेकिन किसी तरह के लालच में आकर धर्म परिवर्तन करना महापाप है। योगी ने बताया कि सनातन धर्म की परंपरा रही है कि उसने कभी अपनी श्रेष्ठता का ढिंढोरा नहीं पीटा, बल्कि मानव सेवा और संरक्षण को ही अपना धर्म माना। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमेशा जरूरतमंदों को सहारा दिया है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
यह उत्सव गीता पढ़ने के लिए प्रेरित करने का एक अभियान
‘जीओ गीता परिवार’ की तरफ से आयोजित यह उत्सव लोगों को गीता पढ़ने, समझने और उसे जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करने का अभियान है। संस्था का मानना है कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक है। ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि डिजिटल युग में गीता विनाशकारी नहीं, बल्कि मार्गदर्शक शक्ति है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी तभी बनेगी जब नागरिक स्वयं ‘स्मार्ट’ बनेंगे, जिसके लिए गीता का अध्ययन आवश्यक है।
वैश्विक आंदोलन बन चुका है गीता उत्सव, बढ़-चढ़कर अपना रहे लोग
संस्था के जनरल सेक्रेटरी प्रदीप मित्तल और मणि प्रसाद मिश्र ने बताया कि यह आंदोलन अब वैश्विक स्वरूप ले चुका है। कई देशों में लोग गीता के संदेश को जीवनशैली के रूप में अपनाने लगे हैं, जिससे विश्व स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रभाव बढ़ रहा है।
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