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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 19 Dec 2025, 11:04 am
पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर को गुरुवार शाम बी-वारंट के तहत देवरिया जेल से वाराणसी लाकर सेंट्रल जेल में निरुद्ध किया गया है। वाराणसी पहुंचने के बाद उन्हें केंद्रीय कारागार की तन्हाई बैरक में रखा गया, जहां उन्होंने पहली रात बेचैनी में बिताई। जेल सूत्रों के मुताबिक, अमिताभ ठाकुर रात भर ठीक से सो नहीं पाए और बैरक में करवटें बदलते रहे। उन्हें ओढ़ने के लिए दो कंबल उपलब्ध कराए गए थे। शुक्रवार को अमिताभ ठाकुर को वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय की स्पेशल सीजेएम कोर्ट में पेश किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से उन्हें कड़ी निगरानी और पुख्ता बंदोबस्त के बीच तन्हाई बैरक से अदालत ले जाया जाएगा। हिंदू संगठनों में आक्रोश को देखते हुए अदालत परिसर के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे चौक पुलिस की टीम अमिताभ ठाकुर को देवरिया जेल से लेकर वाराणसी के शिवपुर थाना क्षेत्र स्थित केंद्रीय कारागार पहुंची। सुरक्षा कारणों से जेल परिसर की अन्य बैरकों को अस्थायी रूप से बंद कराया गया। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने, नाम-पता दर्ज करने और बी-वारंट की प्रति जेल प्रशासन को सौंपने के बाद उन्हें तन्हाई बैरक में शिफ्ट किया गया। बैरक के बाहर अलग से बंदी रक्षक तैनात किए गए हैं, ताकि उनका किसी अन्य कैदी से संपर्क न हो सके। अदालत में पेशी के बाद उन्हें पुनः देवरिया जेल भेजे जाने की संभावना है।
यह मामला वाराणसी के चौक थाने में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है। हिंदू युवा वाहिनी के नेता और वाराणसी विकास प्राधिकरण बोर्ड के सदस्य अंबरीश सिंह ‘भोला’ ने 8 दिसंबर को अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पत्र और वीडियो साझा किया, जिसमें अंबरीश सिंह भोला पर कफ सिरप तस्करी समेत अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के झूठे आरोप लगाए गए। इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची।
तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया कि पोस्ट किए गए पत्र में अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी को आजाद अधिकार सेना का अध्यक्ष और महासचिव बताया गया था। साथ ही आरोप है कि उक्त सामग्री को अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया गया और एक नवनिर्वाचित मंत्री के खिलाफ भी कथित रूप से निराधार आरोप लगाए गए। पुलिस ने मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर बी-वारंट प्राप्त किया था, जिसके तहत अमिताभ ठाकुर को वाराणसी लाया गया।
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