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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 03 Feb 2026, 01:18 pm
नोएडा। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक बातचीत को बड़ा परिणाम मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को सोशल मीडिया के जरिए दोनों देशों के बीच ट्रेड डील की घोषणा की। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाला टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है। इससे पहले रूस से तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त पेनल्टी जोड़कर भारत पर कुल 50% टैरिफ का बोझ आ गया था। अब यह अतिरिक्त पेनल्टी हटाई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी और भारतीय निर्यात को भी राहत मिलेगी।
टैरिफ घटने से भारतीय निर्यात को मिलेगी राहत
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, पहले लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर लगाई गई अतिरिक्त पेनल्टी को अब कम कर दिया गया है, जिससे भारत पर प्रभावी टैरिफ दर 18% रह जाएगी। इससे भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि इससे टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को फायदा मिलेगा। साथ ही, अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की पकड़ मजबूत हो सकती है। यह फैसला दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देगा और आने वाले समय में व्यापारिक निवेश के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
तेल खरीद और रणनीतिक सहयोग पर भी बनी सहमति
ट्रेड डील से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक हालात पर चर्चा की गई। ट्रम्प ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीद कम कर अमेरिका से ज्यादा ऊर्जा खरीदने पर सहमत हुआ है। जरूरत पड़ने पर वेनेजुएला से तेल आयात की संभावना पर भी चर्चा हुई। ‘बाय अमेरिकन’ नीति के तहत भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों की बड़ी खरीद का भी ऐलान किया गया है। इससे दोनों देशों के ऊर्जा और औद्योगिक सहयोग में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
दोनों नेताओं ने रिश्तों को और मजबूत करने की जताई इच्छा
ट्रेड डील की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे दोनों देशों के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग से जनता को सीधा लाभ मिलेगा। अमेरिका में भारत के राजदूत ने भी पुष्टि की कि तकनीकी औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भविष्य में रक्षा, तकनीक और निवेश के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का रास्ता खोलेगा।