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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 04 Feb 2026, 12:23 pm
उत्तर प्रदेश में वर्षों से कार्यरत करीब 25 हजार अंशकालिक शिक्षकों (अनुदेशकों) के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के फैसले का विरोध किया था। अदालत के इस निर्णय से अनुदेशकों के 17 हजार रुपये मानदेय लागू होने का रास्ता साफ हो गया है और उनकी सेवाओं को केवल अस्थायी संविदा मानने का तर्क भी कमजोर पड़ा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी जब शिक्षकों से लगातार काम लिया गया और उन्हें अन्यत्र नौकरी करने से रोका गया, तो उनकी नियुक्ति को केवल संविदात्मक नहीं माना जा सकता।
राज्य सरकार की अपील खारिज, शिक्षकों को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुदेशकों को उचित पारिश्रमिक से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि लंबे समय तक कम मानदेय पर काम कराना अनुचित श्रम व्यवहार की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों के मानदेय की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि 2017–18 से 17 हजार रुपये मासिक मानदेय प्रभावी माना जाएगा और आगे संशोधन होने तक यह लागू रहेगा।
मानदेय भुगतान और बकाया राशि पर भी निर्देश
डबल बेंच ने आदेश दिया कि संशोधित मानदेय का भुगतान 1 अप्रैल 2026 से शुरू किया जाए। साथ ही लंबित बकाया का भुगतान छह महीने के भीतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे लंबे समय से बढ़े हुए मानदेय की मांग कर रहे शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
लंबे कानूनी संघर्ष के बाद मिला फैसला
अनुदेशकों का मानदेय 2017 में बढ़ाया गया था, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। इसके खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उन्हें आंशिक राहत मिली। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और करीब दो साल की सुनवाई के बाद फैसला शिक्षकों के पक्ष में आया। शिक्षक संगठनों ने इसे हजारों परिवारों के लिए राहत भरा फैसला बताया है और उम्मीद जताई है कि अब मानदेय भुगतान को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद खत्म होगा।