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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 03 Feb 2026, 06:19 pm
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा बयान देकर तस्वीर साफ कर दी है। वाराणसी दौरे पर पहुंचे मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंचायत चुनाव तय समय पर कराने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने साफ किया कि चुनाव विधानसभा चुनाव 2027 के साथ नहीं, बल्कि उससे पहले ही कराए जाएंगे। बैलेट पेपर भी छपकर जिलों तक भेजे जा चुके हैं और जिला स्तर पर चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में पंचायत चुनाव को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
मतदाता सूची अंतिम चरण में, उम्मीदवारों को दी गई तैयारी की सलाह
मंत्री राजभर ने बताया कि पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी 2026 को किया जाएगा। उन्होंने संभावित उम्मीदवारों को सलाह दी कि अंतिम सूची जारी होने से पहले अपने समर्थकों के नाम जुड़वाने की प्रक्रिया पूरी कर लें। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार भी पंचायत चुनाव ईवीएम से नहीं बल्कि पारंपरिक बैलेट पेपर के जरिए ही कराए जाएंगे। प्रदेश के सभी जिलों में चुनाव की तैयारियां तेजी से चल रही हैं और प्रशासनिक स्तर पर भी अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया को समय पर और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाएगा।
अप्रैल से जुलाई के बीच चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की संभावना
राजभर ने कहा कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराए जाएंगे, हालांकि अभी सटीक तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी। पहले चरण में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव होंगे, जबकि बाद में ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के अप्रत्यक्ष चुनाव कराए जाएंगे। जिलों में बैलेट पेपर पहुंच चुके हैं और जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है, जिससे चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।
चुनाव टलने की चर्चाओं पर भी बनी हुई है सियासी बहस
हालांकि राजनीतिक गलियारों में ऐसी भी चर्चा है कि कुछ स्तरों पर पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव के बाद कराने पर भी विचार हुआ है। सूत्रों का कहना है कि पंचायत चुनाव से पहले गांव स्तर पर राजनीतिक खींचतान बढ़ सकती है, जिसका असर आगे होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। वहीं यदि समय पर चुनाव नहीं होते हैं तो ग्राम प्रधान और पंचायत पदों पर प्रशासक नियुक्त करने की नौबत भी आ सकती है। फिलहाल मंत्री के बयान के बाद माना जा रहा है कि सरकार चुनाव तय समय पर कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।