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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 07 Apr 2026, 01:19 pm
कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां युवकों को गेमिंग ऐप के जरिए फंसाकर किडनी डोनेट करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। जांच में खुलासा हुआ है कि पहले युवाओं को ऑनलाइन गेम में जीत का लालच दिया जाता था और बाद में भारी रकम हारने के बाद उन्हें किडनी देने के लिए तैयार किया जाता था। इसके बदले 20 से 25 लाख रुपये देने का झांसा दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, पूरे मामले में अब तक डॉक्टर, ओटी टेक्नीशियन समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और अवैध ट्रांसप्लांट नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गेमिंग ऐप के जरिए फंसाकर बनाया जाता था दबाव
जांच में सामने आया है कि आरोपी डॉक्टरों और उनकी टीम ने टेलीग्राम पर गेमिंग ग्रुप बनाए हुए थे। इन ग्रुप्स के जरिए युवकों को टास्क वाले गेम खेलने के लिए लिंक भेजे जाते थे। शुरुआत में उन्हें आसान टास्क देकर जिताया जाता था, ताकि उनका भरोसा जीता जा सके। इसके बाद धीरे-धीरे गेम मुश्किल होता जाता और बड़ी रकम लगवाई जाती थी। हारने पर युवकों को उधार लेने के लिए उकसाया जाता और जब वे कर्ज में डूब जाते, तब गैंग के सदस्य उनसे संपर्क कर रकम चुकाने का दबाव बनाते थे। इसी दौरान उन्हें किडनी डोनेट करने का विकल्प दिया जाता था।
ब्रेनवॉश कर कराई जाती थी किडनी डोनेशन
पुलिस के अनुसार, कर्ज में फंसे युवकों का मानसिक दबाव बनाकर ब्रेनवॉश किया जाता था। उन्हें समझाया जाता कि शरीर में दो किडनी होती हैं और एक के सहारे भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है। अमेरिका और लंदन की रिसर्च का हवाला देकर उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि किडनी देने के बाद भी कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। इसी तरह बिहार के आयुष कुमार को भी फंसाया गया, जिसका दिल्ली में म्यूल बैंक अकाउंट खुलवाया गया और उसे 9.50 लाख रुपये में किडनी डोनेट करने के लिए राजी किया गया। पुलिस अब ट्रांजेक्शन और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
50 से ज्यादा ट्रांसप्लांट, जांच जारी
अब तक की जांच में सामने आया है कि सिर्फ कानपुर में 50 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। पुलिस डॉक्टरों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। 6 और संदिग्धों की पहचान हो चुकी है, जिन्हें जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए साइबर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह गिरोह कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था।