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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 07 Apr 2026, 06:50 pm
लखनऊ। बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं होगा। उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुन सकेंगे। इस फैसले से उन लाखों लोगों को राहत मिलेगी, जो बार-बार रिचार्ज और तकनीकी समस्याओं से परेशान थे।
उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के नए आदेश के अनुसार, जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां सभी नए और पुराने बिजली कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। लेकिन अब यह उपभोक्ता पर निर्भर करेगा कि वह प्रीपेड मीटर चाहता है या पोस्टपेड। पहले नए कनेक्शनों पर प्रीपेड मीटर अनिवार्य रूप से लगाए जा रहे थे, जिसका कई संगठनों और उपभोक्ताओं द्वारा विरोध किया जा रहा था। इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने की आजादी मिल गई है।
प्रदेश में पहले ही लग चुके हैं लाखों मीटर
उत्तर प्रदेश में अब तक 78 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें करीब 70 लाख प्रीपेड मीटर हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद लंबे समय से इस अनिवार्यता के खिलाफ आवाज उठा रहा था। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह उपभोक्ताओं की बड़ी जीत है। इससे अब किसी को भी जबरन प्रीपेड मीटर नहीं लगवाना पड़ेगा और बिजली सेवाओं को लेकर भरोसा भी बढ़ेगा।
कानूनी संशोधन के बाद बदला नियम
यह बदलाव विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत किया गया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी साफ किया था कि प्रीपेड मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है। नए नियम के तहत उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार मीटर का चुनाव कर सकते हैं। इस फैसले से बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है और आने वाले समय में स्मार्ट मीटर व्यवस्था और अधिक लचीली और उपभोक्ता हितैषी बन सकेगी।