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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 02 Jan 2026, 02:33 pm
कौशांबी में झुग्गी-झोपड़ी में चलाए गए पुलिस सत्यापन अभियान के दौरान दिया गया एक बयान अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। थाने के प्रभारी अजय शर्मा का यह कहना कि “हमारे पास एक ऐसी मशीन है जो लगाते ही बता देगी कि कौन कहां का रहने वाला है, वह बांग्लादेश का है या कहीं और का है सब पचा चल जाता है।” अब उनका यह बयान जमकर वायरल हो रहा है और लोग इस पर नाराजगी जता रहे हैं। बता दें कि यह अभियान 23 दिसंबर को चला था, लेकिन इसका 26 सेकंड का वीडियो एक जनवरी को वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की बयानबाजी पर सवाल उठने लगे हैं।
23 दिसंबर को सुरक्षा के दृष्टिगत कौशांबी पुलिस ने झुग्गी क्षेत्र में सत्यापन अभियान चलाया था। इस दौरान पुलिस टीम ने वहां रह रहे लोगों से पहचान से जुड़े दस्तावेज मांगे। इसी क्रम में एक व्यक्ति से जब पहचान पत्र दिखाने को कहा गया तो पता चला कि वह मूल रूप से बिहार के अरनिया जिले का रहने वाला है। पहचान पत्र देखने के बाद थाना प्रभारी ने बातचीत के दौरान यह टिप्पणी कर दी कि चाहे कोई बिहार का हो या बांग्लादेश का, पुलिस के पास ऐसी मशीन है जो तुरंत बता देगी कि व्यक्ति कहां का है।
मोबाइल को बताया ‘मशीन’, वीडियो में कैद हुआ पूरा वाकया
वीडियो में देखा जा सकता है कि थाना प्रभारी मशीन लाने की बात कहते हैं और फिर अपना मोबाइल फोन उस व्यक्ति की पीठ पर लगाकर कहते हैं कि मशीन बता रही है कि वह बांग्लादेशी है। इस पर व्यक्ति घबराते हुए सफाई देता है कि यहां कोई भी बांग्लादेशी नहीं है, सभी लोग बिहार और अन्य राज्यों से हैं। यह पूरा संवाद कैमरे में कैद हो गया और बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने इसे पुलिस की गैर-गंभीरता और हास्यास्पद रवैये से जोड़ते हुए तीखी टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस इस तरह के बयान देकर लोगों को डराने की कोशिश कर रही है। कुछ लोगों ने इसे मजाकिया अंदाज में लिया तो कई ने इसे आम नागरिकों के साथ दबाव बनाने की मानसिकता बताया। वायरल वीडियो ने देखते ही देखते पुलिस की छवि को लेकर नई बहस छेड़ दी।
पुलिस का पक्ष: दबाव बनाने का आरोप गलत
मामले पर सफाई देते हुए एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र में सत्यापन अभियान नियमित प्रक्रिया के तहत चलाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति पर कोई दबाव नहीं बनाया गया और न ही किसी को परेशान करने की मंशा थी। एसीपी के अनुसार, वीडियो को गलत संदर्भ में वायरल किया जा रहा है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों की इस सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर बहस थमती नजर नहीं आ रही है और लोग बयान की भाषा व तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।
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