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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 24 Dec 2025, 11:33 am
यूपी के उन्नाव दुष्कर्म के दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़िता ने गंभीर आशंका जताई है। उसने कहा कि उसकी जान को खतरा है और यह फैसला उसके लिए “जिंदा रहते हुए सजा” जैसा है। पीड़िता का कहना है कि वह इसलिए बची रह गई, क्योंकि सच सामने आ गया, लेकिन अब उसे और उसके परिवार को डर के साए में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उसने कहा कि देश में निर्भया और हाथरस जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, अब उसे भी उसी अंजाम का डर सताने लगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को अपील पर अंतिम सुनवाई तक निलंबित करते हुए जमानत दे दी। हालांकि, फिलहाल सेंगर जेल से बाहर नहीं आएगा, क्योंकि पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में उसे तीस हजारी कोर्ट से 10 साल की सजा मिली हुई है। इस मामले में दायर जमानत याचिका पर 28 दिसंबर को फैसला आना है। अगर इसमें भी जमानत मिल गई, तो सेंगर जेल से बाहर आ जाएगा।
कोर्ट की शर्तें, फिर भी पीड़िता को डर
दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कई शर्तें लगाई हैं। सेंगर जमानत अवधि में दिल्ली नहीं छोड़ सकेगा, पीड़िता के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा और उसे अपना पासपोर्ट भी जमा करना होगा। इसके अलावा हर सोमवार को थाने में हाजिरी देना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत रद्द कर दी जाएगी। इन शर्तों के बावजूद पीड़िता का कहना है कि असली खतरा कुलदीप सेंगर से नहीं, बल्कि उसके समर्थकों और रसूखदार लोगों से है। उसने कहा कि पांच किलोमीटर की दूरी का नियम कागजों में ठीक लगता है, लेकिन उसके लोग कहीं से भी पहुंच सकते हैं। पीड़िता का आरोप है कि उसके मामले के कई गवाह आज भी उसी इलाके में रहते हैं और उनकी सुरक्षा पहले ही हटा ली गई है। ऐसे में अब सब डरे हुए हैं और किसी के पास कोई सुरक्षा नहीं है।
फैसले के वक्त कोर्ट के बाहर रोती रही पीड़िता
जब हाईकोर्ट में जमानत का फैसला सुनाया जा रहा था, उस वक्त पीड़िता कोर्ट के बाहर मौजूद थी और फूट-फूट कर रो पड़ी। उसने आरोप लगाया कि यह मामला जानबूझकर तीन महीने तक लटकाया गया, जबकि आम तौर पर बहस पूरी होने के कुछ दिनों में फैसला आ जाता है। पीड़िता का कहना है कि सेंगर एक ताकतवर नेता है और सत्ताधारी दल से जुड़ा रहा है, इसलिए उसे यह राहत मिली है। पीड़िता ने यह भी कहा कि कुलदीप ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके भाई ने उसके पिता की हत्या कराई, लेकिन आज दोनों बाहर हैं। वहीं, उसके चाचा, जिन पर न दुष्कर्म का आरोप है और न हत्या का, सात साल से जेल में बंद हैं। उसने सवाल उठाया कि आखिर उसके परिवार के साथ ही यह अन्याय क्यों हो रहा है। पीड़िता का कहना है कि इस फैसले ने उसके जख्म फिर से हरे कर दिए हैं और अब वह अपने और अपने परिवार के भविष्य को लेकर बेहद डरी हुई है।
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