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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 11 Feb 2026, 12:38 pm
लखनऊ नगर निगम में काम करने वाली कार्यदाई संस्थाओं द्वारा कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआईसी जमा करने के नाम पर बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। कैग रिपोर्ट और विधानसभा की स्थानीय निकाय जांच समिति में खुलासा हुआ कि हजारों कर्मचारियों का भविष्य निधि और बीमा अंशदान समय पर जमा ही नहीं किया गया। जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2013-14 और 2014-15 के दौरान कई कंपनियों ने कर्मचारियों के खाते से रकम काटी, लेकिन संबंधित विभागों में चालान जमा नहीं किया। अब नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई तेज कर दी है और संबंधित कंपनियों से रकम वसूली के साथ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
पांच कंपनियों ने नहीं जमा किए चालान, 64 लाख की रिकवरी बाकी
जांच में कुल आठ कंपनियों के नाम सामने आए थे, जिन पर कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआईसी का करीब 1.14 करोड़ रुपये जमा न करने का आरोप लगा। नगर निगम का दावा है कि इनमें से लॉयन सिक्योरिटी और उससे जुड़ी कंपनी ने बाद में अपनी देनदारी जमा कर दी, लेकिन बाकी पांच कंपनियों ने अभी तक कोई भुगतान नहीं किया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके श्रीवास्तव की ओर से हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। शिकायत में बताया गया कि करीब 64 लाख रुपये की रिकवरी अब भी लंबित है। कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद कंपनियों ने कोई जवाब नहीं दिया, जिससे नगर निगम को कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाना पड़ा।
कंपनियों पर जुर्माना, कई संस्थाएं काम छोड़ चुकीं
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, मेसर्स राज श्री पर करीब 17.88 लाख रुपये जमा करने की जिम्मेदारी थी, जबकि ईपीएफ न जमा करने पर अतिरिक्त जुर्माना भी लगा। इसी तरह स्वच्छकार इंटरप्राइजेज, पटवा एसोसिएट, ड्रेगन सिक्योरिटी और आर्यन सिक्योरिटी जैसी संस्थाओं पर भी लाखों रुपये बकाया हैं। कुछ कंपनियां अब नगर निगम के साथ काम भी नहीं कर रहीं, फिर भी बकाया रकम जमा नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों के हित को देखते हुए वसूली और कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो सके।
लॉयन सिक्योरिटी को लेकर उठे सवाल, ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं?
मामले में विवाद तब और बढ़ गया जब आरोप लगा कि लॉयन सिक्योरिटी और उससे जुड़ी कुछ कंपनियों के नाम तहरीर से बाहर कर दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित कंपनी ने बकाया रकम चालान के रूप में जमा कर दी, इसलिए मुकदमे की जरूरत नहीं रही। हालांकि, सवाल उठ रहे हैं कि गड़बड़ी सामने आने के बाद भी कंपनी को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया और उसे शहर के कई जोन में काम कैसे दिया गया। इस फैसले पर अब प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है और पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
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