भयानक आग के बीच खोए बच्चे तो फूट-फूटकर रोया पिता, 8 घंटे बाद मिले तो छलक पड़े खुशी के आंसू

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 17 Apr 2026, 02:26 pm
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लखनऊ के विकास नगर में भीषण आग के बीच रहमान के दो छोटे बच्चे लापता हो गए थे। पूरी रात डर और बेबसी में गुजरी, लेकिन देर रात दोनों सुरक्षित मिल गए। बच्चों के मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।

लखनऊ के विकास नगर में लगी भीषण आग ने सैकड़ों परिवारों की दुनिया उजाड़ दी, लेकिन इसी तबाही के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। रहमान नाम के एक पिता के लिए यह रात किसी डरावने सपने से कम नहीं थी। आग की लपटों के बीच उनके दोनों छोटे बच्चे लापता हो गए थे। हर गुजरते पल के साथ उनकी उम्मीदें टूटती जा रही थीं। वह और उनकी पत्नी बच्चों को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते पूरी तरह टूट चुके थे। चीख-पुकार, अफरा-तफरी और धुएं के बीच उन्हें बस एक ही डर सता रहा था—कहीं उनके बच्चे इस आग में हमेशा के लिए खो न गए हों।


खोए बच्चों की तलाश में टूटा परिवार, हर पल लगा आखिरी जैसा

रहमान बताते हैं कि जैसे-जैसे आग बढ़ रही थी, वैसे-वैसे उनका डर भी गहराता जा रहा था। उन्होंने हर जगह बच्चों को ढूंढ़ा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। हालात इतने खराब थे कि उन्हें लगने लगा कि शायद उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया है। इसी घबराहट और सदमे में उन्होंने लोगों को चार बच्चों के लापता होने की बात कह दी, जबकि उनके दो ही बच्चे थे। उस समय उनका मानसिक संतुलन बिगड़ चुका था। चारों तरफ बस आग, धुआं और चीखें थीं। हर पल उन्हें यही लग रहा था कि अब कुछ भी बचा नहीं है। उस डर और बेबसी को शब्दों में बयान करना मुश्किल है।


देर रात आई राहत की खबर, बच्चों को देख पिता की आंखों से छलक पड़े आंसू

घंटों की बेचैनी और दर्द के बाद देर रात एक ऐसी खबर आई जिसने रहमान की जिंदगी बदल दी। किसी ने बताया कि उनके दोनों बच्चे आग वाले इलाके के दूसरी तरफ सुरक्षित हैं। यह सुनते ही जैसे उनकी सांसें लौट आईं। जब उन्होंने अपने 5 साल के बेटे रहीम और 6 साल की बेटी आलिया को सुरक्षित देखा, तो उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने कहा कि यह पल उनके लिए नई जिंदगी मिलने जैसा है। उस समय उन्हें अपनी जली हुई झुग्गी या सामान का कोई दुख नहीं था, बस बच्चों का मिलना ही सबसे बड़ी खुशी थी।


पहले ही झेल चुके थे बेटे की मौत, अब टूटने से बच गया परिवार

रहमान ने बताया कि चार महीने पहले ही उन्होंने अपने 12 साल के बड़े बेटे को बीमारी में खो दिया था। उस दुख से वह अभी उबर भी नहीं पाए थे कि यह हादसा हो गया। अगर इस बार भी उनके बच्चों को कुछ हो जाता, तो शायद वह यह सदमा सह नहीं पाते। उन्होंने कहा कि उनकी सारी जमा-पूंजी जलकर राख हो गई, लेकिन उन्हें उसका कोई अफसोस नहीं है। उनके लिए सबसे बड़ी दौलत उनके बच्चे हैं, जो उन्हें वापस मिल गए। फिलहाल वह अपने दर्द को भुलाकर सिर्फ इस बात के लिए शुक्र मना रहे हैं कि उनका परिवार आज भी साथ है।

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