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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 02 Dec 2025, 01:13 pm
एसटीएफ का फरार सिपाही आलोक सिंह मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ एक दिन पहले ही लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। आलोक कोडीनयुक्त नशीले कफ सिरप की तस्करी के मामले में वांछित था। उसके पूर्वांचल के बाहुबली और पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ कई तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिससे उसकी गतिविधियों पर संदेह और बढ़ गया था। गिरफ्तारी के बाद आलोक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहा था और लखनऊ कोर्ट में इसके लिए अर्जी भी दाखिल कर चुका था। हालांकि एसटीएफ ने तकनीकी निगरानी और ठोस इनपुट के आधार पर उसे पहले ही दबोच लिया।
नशीले कफ सिरप की तस्करी में कई गिरफ्तारियां होने के बाद आलोक सिंह विदेश भागने की योजना बना रहा था। उसके फरार होने की आशंका में एसटीएफ ने सोमवार को लुकआउट सर्कुलर जारी किया था और उसके ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही थी। मंगलवार को जब वह कोर्ट में सरेंडर करने जा रहा था, तभी एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया।
पहले भी कई मामलों में आलोक का नाम आ चुका सामने
यह पहला मौका नहीं है जब आलोक का नाम किसी बड़े आपराधिक मामले में सामने आया हो। साल 2006 में प्रयागराज के एक कारोबारी से लखनऊ में चार किलो सोना लूटने के मामले में वह पांच अन्य पुलिसकर्मियों और दो नागरिकों के साथ आरोपी बनाया गया था। हालांकि सत्र अदालत ने साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। उस मामले में अदालत ने पुलिस की शुरुआती जांच पर भी कई सवाल उठाए थे।
आरोपी आलोक गाजियाबाद में भी नामजद
आलोक सिंह पहले से ही गाजियाबाद में दर्ज एक एफआईआर में नामजद था। इसके अलावा लखनऊ में कफ सिरप तस्करी के मामले की विवेचना में भी उसका नाम उजागर हुआ। जांच में पता चला कि तस्करी सिंडीकेट को सिक्योर करने और उसके संचालन में उसकी अहम भूमिका थी। एसटीएफ के मुताबिक जांच के दौरान उसके खिलाफ कई पुख्ता सबूत इकट्ठा किए गए हैं जो सिंडीकेट में उसकी गहरी संलिप्तता को दर्शाते हैं।
आलोक सिंह की गिरफ्तारी से मिल सकते हैं कई अहम सबूत
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आलोक सिंह की गिरफ्तारी नेटवर्क के कई गहरे तारों का खुलासा कर सकती है, जिनमें दुबई कनेक्शन, फर्जी फर्मों का जाल और रियल एस्टेट में लगाए गए अवैध धन की जानकारी शामिल है। यह भी माना जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली सफेदपोश भी इस नेटवर्क को संरक्षण देते रहे हैं, जिनकी पहचान पूछताछ में सामने आ सकती है।
ईडी और एसटीएफ संयुक्त रूप से करेंगी पूछताछ
आलोक की गिरफ्तारी के बाद अब ईडी और एसटीएफ उसकी संयुक्त पूछताछ की तैयारी कर रही हैं। ईडी को शक है कि सौ करोड़ से अधिक के इस अवैध कारोबार में मनी लॉन्ड्रिंग के ठोस प्रमाण मौजूद हैं। उसकी बैंकिंग गतिविधियों, विदेश यात्राओं और संपर्कों की गहन जांच की जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
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