जैसे-जैसे धार्मिक और सनातन समाज के लोग एक होते जाएंगे, वैसे-वैसे आसुरी शक्तियां टूट जाएंगी: भागवत

Curated By: shivnowup | Hindi Now Uttar Pradesh • 11 Jan 2026, 01:02 pm
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वृंदावन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सनातन समाज के एक होने से आसुरी शक्तियां कमजोर होंगी। उन्होंने भेदभाव मुक्त भारत, धर्म आधारित राष्ट्र और भक्ति को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताया।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को वृंदावन में आयोजित शताब्दी महोत्सव के उद्घाटन समारोह में सामाजिक एकता, धर्म और राष्ट्र की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। सुदामा कुटी आश्रम के संस्थापक संत सुदामा दास जी महाराज के 10 दिवसीय शताब्दी महोत्सव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे धार्मिक समाज और सनातन समाज के लोग एक होते जाएंगे, वैसे-वैसे आसुरी शक्तियां कमजोर होकर टूटती जाएंगी। उन्होंने पिछले 50 वर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदू समाज के संगठित होने के साथ ही समाज को तोड़ने वाली ताकतों के टुकड़े होते चले गए हैं। भागवत के इस बयान को सामाजिक समरसता और संगठन के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


हमारा राष्ट्र धर्म के लिए बना है: मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का निर्माण धर्म के लिए हुआ है और राष्ट्र का उद्देश्य समय-समय पर दुनिया को धर्म के ज्ञान से आलोकित करना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का दायित्व है कि वह अपने आचरण और जीवन शैली के माध्यम से यह बताए कि धर्ममय जीवन कैसे जिया जाता है। भागवत ने कहा कि जब समाज सत्य, करुणा और शुचिता के मार्ग पर खड़ा होता है, तब उसे कोई शक्ति पराजित नहीं कर सकती। संतों के तप और साधना की छाया में खड़ा समाज कठिन से कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म केवल उपदेश नहीं, बल्कि आचरण का विषय है, जिसे जीवन में उतारना आवश्यक है।


भेदभाव मुक्त भारत की आवश्यकता पर जोर
साधु-संतों की उपस्थिति में मोहन भागवत ने कहा कि देश को आज भेदभाव मुक्त भारत की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज कभी किसी की वीरता या शौर्य से पराजित नहीं हुआ, जब भी हार हुई तो वह आपसी फूट के कारण हुई। भाषा, जाति, पंथ और क्षेत्र के आधार पर विभाजन को समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज स्वभाव से सामाजिक है और विविधताओं से भरा हुआ है। जितने प्रकार से दुनिया हिंदुओं को देखती है, उतने ही मित्र हमें समाज में बनाने चाहिए। आपसी मित्रता और समरसता ही समाज को मजबूत बना सकती है।


भक्ति को बताया सबसे बड़ी शक्ति
आरएसएस प्रमुख ने अपने संबोधन में भक्ति को शक्ति बताते हुए कहा कि जुड़ाव ही भक्ति है और सत्संग का महत्व इसी कारण है। उन्होंने कहा कि भक्ति के माध्यम से आत्मिक बोध जागृत होता है, जो समाज को जोड़ने का कार्य करता है। भागवत ने कहा कि यदि समाज भक्ति, करुणा और संगठन के आधार पर आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले 20–30 वर्षों में भारत विश्व गुरु के रूप में संपूर्ण दुनिया को सुख और शांति का मार्ग दिखाएगा। उन्होंने कहा कि भारत का जन्म इसी उद्देश्य के लिए हुआ है और अब समय है कि समाज इस दिशा में पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़े।


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