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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 13 Feb 2026, 04:23 pm
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी जल्द ही समाजवादी पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार शाम तक इसका औपचारिक ऐलान हो सकता है। बताया जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनकी कई दौर की बातचीत हो चुकी है और पश्चिमी यूपी में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद से उनके अगले कदम को लेकर सियासी हलकों में लगातार चर्चाएं चल रही थीं।
पश्चिम यूपी में मुस्लिम वोट बैंक साधने की सपा की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा का यह कदम सीधे तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में नसीमुद्दीन की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है। कांग्रेस में सक्रिय रहते हुए भी उनका प्रभाव क्षेत्र बना रहा, लेकिन संगठन में उन्हें अपेक्षित भूमिका नहीं मिल पा रही थी। सपा चाहती है कि आजम खान के बाद खाली पड़े बड़े मुस्लिम चेहरे की जगह को भरा जाए। वहीं, बसपा भी इस क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा रही है, ऐसे में सपा इस कदम के जरिए विपक्षी दलों की रणनीति को भी संतुलित करना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि इससे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जमीन मजबूत होगी।
कांग्रेस से दूरी और नई राजनीतिक पारी की शुरुआत
नसीमुद्दीन ने 24 जनवरी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। उनका कहना था कि पार्टी में उन्हें जमीन पर काम का अवसर नहीं मिल पा रहा था। लंबे समय तक सक्रिय राजनीति करने के बावजूद उनकी भूमिका सीमित होती जा रही थी। वे कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक बयान देने से भी बचते रहे, क्योंकि राज्य में सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावना बनी हुई है। अब सपा में शामिल होकर वे अपने राजनीतिक भविष्य को नई दिशा देना चाहते हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें पश्चिम यूपी में संगठनात्मक मजबूती का बड़ा जिम्मा दे सकती है।
बसपा से मंत्री पद तक, लंबा रहा सियासी सफर
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर बहुजन समाज पार्टी से शुरू हुआ था, जहां वे पार्टी संस्थापक कांशीराम के करीबी माने जाते थे। बाद में मायावती सरकार में वे कैबिनेट मंत्री भी रहे और उन्हें बेहद प्रभावशाली नेता माना जाता था। 2017 के बाद बसपा से अलग होकर उन्होंने नई पार्टी बनाई और फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। अब सपा के साथ नई पारी शुरू करने जा रहे सिद्दीकी पर सबकी नजरें टिकी हैं कि वे बदलते राजनीतिक समीकरणों में कितना असर दिखा पाते हैं।
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