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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 17 Apr 2026, 06:24 pm
प्रयागराज के एक छोटे से गांव में गुरुवार दोपहर ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। कच्चे छप्पर में लगी आग ने 5 साल की मासूम सोना की जिंदगी छीन ली। उस वक्त उसके मां-बाप खेत में काम कर रहे थे और घर पर पांच बच्चे थे। अचानक लगी आग ने सब कुछ बदल दिया। बड़ी बहन ने हिम्मत दिखाते हुए एक छोटे भाई और दो बहनों को किसी तरह बाहर निकाल लिया, लेकिन सोना अंदर ही सोती रह गई। जब तक किसी को समझ आता, आग इतनी भड़क चुकी थी कि उसे बचाने का कोई रास्ता नहीं बचा।
बहन की कोशिश भी न बचा सकी, आग ने छीन लिया सबसे प्यारा रिश्ता
दोपहर करीब तीन बजे जैसे ही छप्पर में आग लगी, बच्चों में चीख-पुकार मच गई। बड़ी बहन शिवानी ने अपने एक साल के भाई को गोद में उठाया और बाकी बहनों के साथ बाहर भागी। उस घबराहट में किसी का ध्यान सोना पर नहीं जा सका, जो अंदर गहरी नींद में थी। कुछ ही पलों में आग ने पूरे छप्पर को अपनी चपेट में ले लिया। जब तक लोग उसे ढूंढ़ते और अंदर पहुंचते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यह पल परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया, जिसे शायद कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
पानी की कमी बनी सबसे बड़ी बेबसी, ग्रामीण देखते रह गए सब कुछ जलता हुआ
बच्चों की चीखें सुनकर ग्रामीण दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे और आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आसपास पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। लोग बेबस होकर सिर्फ आग की लपटों को बढ़ते हुए देखते रहे। जब आग किसी तरह शांत हुई, तब छप्पर के अंदर से सोना की झुलसी हुई लाश मिली। इस हादसे में घर का सारा सामान भी जलकर राख हो गया, दो बकरियों की मौत हो गई और एक भैंस बुरी तरह झुलस गई। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस हादसे से टूट चुका है।
खेत से लौटे माता-पिता, सामने थी बेटी की जली हुई दुनिया
मां-बाप जब खेत से लौटे, तो उनके सामने जो मंजर था, उसने उनकी दुनिया उजाड़ दी। उनकी मासूम बेटी अब इस दुनिया में नहीं थी। दोनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह चूल्हे से निकली चिंगारी मानी जा रही है। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गरीबों की जिंदगी इतनी असुरक्षित क्यों है।