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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 17 Apr 2026, 06:00 pm
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को अपने एक आदेश से देश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की जांच CBI को सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की याचिका पर आया है, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता लेने का आरोप लगाया गया था। इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और मामला अब कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी अहम बन गया है।
पहले खारिज हो चुकी थी याचिका, अब नए सिरे से जांच के आदेश
इससे पहले 28 जनवरी 2026 को MP-MLA कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि नागरिकता से जुड़ा कोई ठोस और नया साक्ष्य पेश नहीं किया गया है। लेकिन अब हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में नए दस्तावेजों का हवाला दिया गया, जिसके आधार पर कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी यूनाइटेड किंगडम में मतदाता रहे हैं और वहां के चुनावी रिकॉर्ड में उनका नाम शामिल है, जो इस मामले को गंभीर बनाता है।
गृह मंत्रालय से मांगी गईं ‘टॉप सीक्रेट’ फाइलें, जांच में आए नए मोड़
सुनवाई के दौरान जज सुभाष विद्यार्थी ने गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन को निर्देश दिए कि मामले से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज अदालत में पेश किए जाएं। मंत्रालय ने कथित तौर पर ‘टॉप सीक्रेट’ फाइलें कोर्ट में सौंपीं, जिनकी जांच के बाद अदालत ने यह अहम आदेश दिया। इस कदम ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर नागरिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
गंभीर धाराओं में केस की मांग, आगे की जांच पर टिकी नजरें
याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923, पासपोर्ट एक्ट 1967 और फॉरेनर्स एक्ट 1946 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का है। अब CBI जांच के आदेश के बाद सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यह मामला आगे किस दिशा में बढ़ता है।