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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 17 Dec 2025, 07:25 pm
लखनऊ विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर मंगलवार को समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि दोनों नेताओं के हालिया बयानों और कृत्यों से महिलाओं का अपमान हुआ है और इससे महिला विरोधी मानसिकता को बढ़ावा मिल रहा है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र हाथों में चूड़ियां लेकर पहुंचे थे। उनका कहना था कि यह चूड़ियां उन नेताओं को भेंट करने के लिए हैं, जिनकी सोच और बयान महिलाओं के प्रति असम्मानजनक हैं।
छात्रों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जैसे ही पुतला फूंका गया, विश्वविद्यालय परिसर और उसके आसपास का माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुतला दहन की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और पुतला छीनने की कोशिश भी की। इसी दौरान पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हो गई। हालांकि पुलिस की मौजूदगी से स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया, लेकिन कुछ समय तक माहौल गर्म बना रहा।
मंत्री संजय निषाद का बयान महिलाओं का सीधा अपमान
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि मंत्री संजय निषाद का बयान महिलाओं का सीधा अपमान है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को अपनी भाषा और व्यवहार में संयम रखना चाहिए। छात्रों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनके आचरण और फैसलों से महिला सम्मान को ठेस पहुंची है। इस तरह की घटनाएं समाज में महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता को उजागर करती हैं।
महिलाओं के सम्मान से नहीं किया जाएगा समझौता
छात्र नेता तौकील ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र संगठन तब तक शांत नहीं बैठेंगे, जब तक संबंधित नेता अपने बयान और कृत्यों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते। तौकील ने चेतावनी दी कि यदि जल्द माफी नहीं दी गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। समाजवादी छात्र सभा के नेताओं ने कहा कि उनका यह विरोध किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे बयानों और घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।
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