ईरान-ईजराइल जंग से टूटा बाजार, निफ्टी 700 तो सेंसेक्स 2000 अंक टूटा, क्रूड ऑयल 10 दिन में 60 फीसदी चढ़ा

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 09 Mar 2026, 12:32 pm
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स करीब 1700 अंक और निफ्टी 500 अंक टूट गया, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर 92.28 पर पहुंच गया।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार (9 मार्च) को कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 1700 अंक यानी 2.15% की गिरावट के साथ 77,200 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं Nifty 50 भी लगभग 500 अंक यानी 2.12% टूटकर 23,500 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आज बैंकिंग, ऑटो, मेटल, एनर्जी और FMCG सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात के कारण निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।


भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता

विश्लेषकों का कहना है कि Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव तथा इसमें United States की भूमिका के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे हालात में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसी आशंका के चलते निवेशक शेयर बेचकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं, जिससे बाजार में गिरावट आती है।


बाजार गिरने की तीन मुख्य वजहें

शेयर बाजार में गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—

  • ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने का डर।

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, जिससे भारत का आयात बिल और महंगाई बढ़ सकती है।

  • अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर पड़ना।


कच्चा तेल 10 दिन में 60% तक महंगा

वैश्विक बाजार में Brent Crude Oil की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड 25% से अधिक बढ़कर करीब 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। 28 फरवरी को शुरू हुए तनाव के बाद महज 10 दिनों में कच्चे तेल की कीमत लगभग 60% तक बढ़ चुकी है। इससे पहले 2022 में Russia-Ukraine War के दौरान भी तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जारी रहा तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है और ये 5 से 6 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त तेल भंडार उपलब्ध है।


डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो पर

वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय मुद्रा भी दबाव में है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 46 पैसे कमजोर होकर 92.28 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात और तेल की कीमतों में उछाल के कारण विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ी है, जिससे रुपये में यह गिरावट देखने को मिली।


वैश्विक बाजारों का असर

वैश्विक बाजारों में भी उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिका में 6 मार्च को Dow Jones Industrial Average 453 अंक गिरकर 47,501 पर बंद हुआ। वहीं Nasdaq Composite 1.59% गिरकर 22,387 और S&P 500 90 अंक गिरकर 6,740 के स्तर पर बंद हुआ। भारतीय बाजार में इससे पहले 6 मार्च को भी गिरावट देखने को मिली थी, जब सेंसेक्स 1097 अंक गिरकर 78,919 पर बंद हुआ था और निफ्टी 315 अंक टूटकर 24,450 के स्तर पर आ गया था।


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