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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 13 Jan 2026, 12:01 pm
चंदौली से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। सांसद ने भगवान राम को समाजवादी बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में पीडीए यानी पिछड़े, दलित और निषाद समाज से ही सहयोग लिया। यह बयान 11 जनवरी 2026 को चकिया में आयोजित सपा के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिया गया, जिसके बाद यह चर्चा का केंद्र बन गया। बयान सामने आते ही समर्थकों और विरोधियों के बीच सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
राम के जीवन से जोड़ा समाजवादी विचार
सांसद वीरेंद्र सिंह ने अपने बयान में भगवान राम के जीवन से उदाहरण देते हुए कहा कि उनके ससुर राजा जनक और पिता दशरथ दोनों ही चक्रवर्ती सम्राट थे, इसके बावजूद भगवान राम ने सत्ता और वैभव के सहारे नहीं बल्कि समाज के वंचित वर्गों से मदद ली। उन्होंने निषादराज, भीलनी और वनवासी समाज का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान राम ने इन्हीं लोगों के सहयोग से जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना किया। सांसद के अनुसार, यह दर्शाता है कि भगवान राम विचारों से समाजवादी थे और उन्होंने हमेशा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राम का यह स्वरूप ही समाजवादी विचारधारा से मेल खाता है, जहां सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की बात होती है।
राजा राम बनाम बनवासी राम की राजनीति
वीरेंद्र सिंह ने अपने बयान में भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा उस राजा राम का समर्थन करती है, जब भगवान राम अयोध्या लौटकर सिंहासन पर बैठे। सांसद ने आरोप लगाया कि उसी दौर में गलत सलाह और चुगली के कारण माता सीता को बनवास भेजा गया। उन्होंने कहा कि समाजवादी लोग उस राम के समर्थक हैं, जो वनवासी थे, जिन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के साथ रहकर जीवन जिया। सांसद के इस बयान को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने राम के दो अलग-अलग रूपों को विचारधारात्मक रूप से प्रस्तुत करने की कोशिश की है।
सोशल मीडिया पर बयान को लेकर सियासी घमासान
सांसद के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सपा समर्थक इसे सामाजिक न्याय और पीडीए राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं भाजपा और अन्य दलों के समर्थक इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर आलोचना कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले चुनावी माहौल में सियासी तापमान और बढ़ा सकता है। फिलहाल सांसद वीरेंद्र सिंह के इस बयान ने चंदौली से लेकर प्रदेश की राजनीति तक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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