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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 04 Dec 2025, 02:22 pm
बरेली में सपा नेता सरफराज वली के मैरिज हॉल पर चल रहे बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरफराज वली को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा है कि वे हाईकोर्ट में अपनी बात रखें। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, उनके मैरिज हॉल पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। आदेश मिलते ही बरेली विकास प्राधिकरण की टीम बुलडोजर लेकर मौके से लौट गई और पुलिस बल भी वापस चला गया। इससे पहले तीन दिन की कार्रवाई में ‘ऐवान-ए-फरहत’ मैरिज हॉल का लगभग 40 फीसदी हिस्सा ढहाया जा चुका था।
बरेली में दो सपा नेताओं की प्रॉपर्टी पर हुई कार्रवाई
मालूम हो कि बरेली में दो सपा नेताओं की प्रॉपर्टी पर बुलडोजर एक्शन लगातार चर्चा में रहा है। बुधवार को सपा नेता मो. राशिद के ‘गुड मैरिज हॉल’ को दो दिन की कार्रवाई के बाद पूरी तरह गिरा दिया गया था। आज सरफराज वली के 10 करोड़ रुपये मूल्य वाले मैरिज हॉल को ढहाया जाना था। इसके लिए पांच थानों की पुलिस और PAC की तैनाती की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही पूरा ऑपरेशन रोक दिया गया।
दो दिनों से दोनों मैरिज हॉल पर गरज रहे बुलडोजर
दोनों मैरिज हॉल पिछले दो दिनों से कार्रवाई की जद में थे। राशिद के मैरिज हॉल का फ्रंट हिस्सा तोड़कर कार्रवाई पूरी की गई, जबकि सरफराज के हॉल की बाउंड्री और आगे का बड़ा हिस्सा गिराया गया। बताया गया कि दोनों इमारतों के ऊपरी हिस्सों में उनके परिवार रहते थे। कुल मिलाकर इन दोनों बिल्डिंगों में छह परिवारों के लगभग 50 लोग रह रहे थे। बुलडोजर चलने पर घर की महिलाएं फूट-फूट कर रोने लगीं। उनका कहना था कि वे बेघर हो गए हैं और समझ नहीं पा रहे कि अब कहां जाएंगे।
राशिद का ‘गुड मैरिज हॉल’ की कीमत 9 करोड़ रुपये
राशिद का ‘गुड मैरिज हॉल’ लगभग 700 वर्ग गज क्षेत्र में बना था, जिसमें बड़ा हॉल और चार कमरे शामिल थे। इसकी कीमत करीब 8 करोड़ रुपये बताई जाती है। सरफराज का ‘ऐवान-ए-फरहत’ लगभग 1,000 वर्ग गज में बना है, जिसमें नीचे हॉल और ऊपर पांच कमरे हैं। इसकी अनुमानित कीमत 10 करोड़ रुपये है।
सरफराज वली पर बरेली दंगे में शामिल होने का आरोप
सरफराज वली पर आरोप है कि बरेली हिंसा के दौरान उन्होंने लोगों से धरने में शामिल होने की अपील की थी। उनके बेटे सैफ वली खान का कहना है कि उनके पिता का आजम खान के साथ पुराना संबंध हज कमेटी के कामकाज की वजह से है और इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब मामला आगे की सुनवाई पर निर्भर करेगा।
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