Curated By:
Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 24 Nov 2025, 06:55 pm
70 के दशक में धर्मेंद्र के दमदार डायलॉग्स ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। उस दौर में ‘बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना’, ‘इलाका कुत्तों का होता है, शेरों का नहीं’, और ‘कुत्ते... कमीने, मैं तेरा खून पी जाऊंगा’ जैसे संवाद नौजवानों की जुबान पर चढ़ गए थे। शोले से लेकर धर्मवीर और कातिलों के कातिल तक, उनकी फिल्मों में ऐसा जोश, जज्बा और देसी अंदाज़ मिलता था कि सिनेमा हॉल तालियों और सीटियों से गूंज उठता था। जब धर्मेंद्र अपने दमदार अंदाज़ में कहते ‘हम वो मर्द हैं, जो मौत का स्वागत मेहमान की तरह करते हैं’, तो दर्शक रोमांचित हो उठते थे।
धर्मेंद्र की खासियत यह थी कि उनके संवाद सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि एक एहसास बन जाते थे। कभी रोमांस, कभी जोश, कभी जज्बा और कभी सादगी से भरे हुए। उनकी आवाज़ और अंदाज़ इन लाइनों को इतना असरदार बना देते थे कि लोग उन्हें सालों तक याद रखते रहे।
यहां पेश हैं धर्मेंद्र के ऐसे 10 मशहूर डायलॉग, जिन पर आज भी लोगों की यादें ताज़ा हो जाती हैं। आइए इन डायलॉग्स के बारे में जानते हैं।
1. “बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना।”
फिल्म: शोले
2. “इश्क एक इबादत है… और इबादत में झूठ नहीं चलता।”
फिल्म: आया सावन झूम के
3. “हम प्यार में हारकर भी जीत जाते हैं।”
फिल्म: फूल और पत्थर
4. “तुम मुस्कुराती रहो… यही मेरी जीत है।”
फिल्म: दिल्लगी
5. “जिसने मोहब्बत की… वो डर के नहीं जीता।”
फिल्म: आया सावन झूम के
6. “हम ताली भी बजा सकते हैं… और गालियां भी दे सकते हैं।”
फिल्म: चुपके चुपके
7. “हम तो शरीफ लगते हैं… पर काम बहुत बुरे करते हैं।”
फिल्म: राजा रानी
8. “मां के आंचल से बड़ी कोई छांव नहीं होती।”
फिल्म: यादों की बारात
9. “हम भी किसी से कम नहीं।”
फिल्म: राजा रानी
10. “दिल भी कोई चीज है… जो हर किसी को दे दूं।”
फिल्म: अनुपमा
धर्मेंद्र के डायलॉग आज भी उतने ही प्रभावशाली लगते हैं, जितने उस दौर में थे। उनके इन डायलॉग्स ने न सिर्फ फिल्मों को यादगार बनाया, बल्कि उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय स्टार्स में शामिल कर दिया। अब आज धर्मेंद्र इस दुनिया से विदा ले लिए और एक युग का अंत सा हो गया, लेकिन आप हमारी यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे।
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