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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 12 Mar 2026, 02:20 pm
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने पहुंचे। यह मुलाकात उस समय हुई जब शंकराचार्य ने लखनऊ में गोरक्षा अभियान का शंखनाद किया है। अखिलेश यादव अपने आवास से करीब 12:30 बजे कृष्णा नगर क्षेत्र पहुंचे, जहां शंकराचार्य प्रवास कर रहे हैं।
अखिलेश यादव के साथ पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी तथा पूर्व सांसद अनु टंडन भी मौजूद रहे। वहां पहुंचकर अखिलेश यादव ने संतों से हाथ जोड़कर प्रणाम किया और शंकराचार्य से आशीर्वाद लिया। इस मुलाकात को प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
गोरक्षा अभियान के दौरान लखनऊ पहुंचे शंकराचार्य
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 7 मार्च को काशी से गोरक्षा अभियान की शुरुआत करते हुए निकले थे। इसके बाद वे जौनपुर, सुल्तानपुर और सीतापुर होते हुए 10 मार्च को लखनऊ पहुंचे। लखनऊ में आयोजित सभा को प्रशासन ने 26 शर्तों के साथ अनुमति दी थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि सभा के दौरान धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के खिलाफ भड़काऊ बयान नहीं दिए जाएंगे और कोविड नियमों का पालन करना होगा। साथ ही किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। शंकराचार्य ने सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि यह कोई शराब की दुकान नहीं है, बल्कि शुद्ध गाय के दूध की दुकान है। उन्होंने कहा कि कम भीड़ होने से पता चलता है कि यहां लोग आस्था के साथ आए हैं।
शंकराचार्य विवाद को लेकर पहले भी गरमाई राजनीति
शंकराचार्य से जुड़े विवाद को लेकर हाल के दिनों में प्रदेश की राजनीति में तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली है। प्रयागराज माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन और शंकराचार्य के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद बच्चों से यौन शोषण के आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई और कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई। इस मामले में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। शंकराचार्य ने इन आरोपों को साजिश बताते हुए प्रयागराज के एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर आरोप लगाए और इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख 9 मार्च तय करते हुए तब तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
सीएम योगी और अखिलेश के बीच भी हुई बयानबाजी
शंकराचार्य विवाद को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच भी तीखी बयानबाजी हुई थी। विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा था कि हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता और किसी को भी व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने कहा था कि केवल गेरुआ वस्त्र पहन लेने से कोई योगी नहीं बन जाता। उन्होंने आरोप लगाया था कि संतों को गंगा स्नान से रोका गया, जो हिंदू परंपरा के खिलाफ है।
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