अब बिहार के डिप्टी सीएम के साथ खेला, तेजस्वी ने कर दिया खुलासा, जानें चौंकाने वाला मामला

Curated By: editor1 | Hindi Now Uttar Pradesh • 10 Aug 2025, 02:21 pm
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बिहार में याब एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के दो वोटर आईडी एपिक नंबर मिले है। इस पर अब बड़ी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। आइये पूरा मामला जानते हैं।

बिहार में मतदाता सूची को लेकर नया विवाद सामने आया है। यहां नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बाद अब उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के नाम पर भी दो EPIC (वोटर आईडी) नंबर पाए गए हैं। चुनाव आयोग (ECI) की वेबसाइट पर जांच में पता चला कि विजय सिन्हा का नाम लखीसराय और पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्रों की सूची में दर्ज है। दोनों कार्ड पर उम्र और पता अलग-अलग हैं, हालांकि नाम और पिता का नाम समान है। एक कार्ड में पिता का नाम “स्व. शारदा रमन सिंह” लिखा है।


2020 के चुनावी शपथपत्र में विजय सिन्हा ने अपनी उम्र 54 वर्ष और पता एग्जीबिशन रोड स्थित पुष्प बिहार अपार्टमेंट के बगल में मां भवानी शारदालय, पटना बताया था, जबकि यह पता किसी भी वोटर आईडी में दर्ज नहीं है।


रविवार को तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि डिप्टी सीएम के दो EPIC नंबर हैं और दोनों में उम्र अलग है। उन्होंने लाइव वेबसाइट पर दोनों आईडी दिखाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिजली गुल होने पर तेजस्वी ने तंज कसा और कहा कि मुख्यमंत्री जी की फ्री बिजली व्यवस्था यही है क्या?


तेजस्वी ने आरोप लगाया कि या तो विजय सिन्हा ने दो जगह साइन किए हैं, या चुनाव आयोग ने गड़बड़ी की है, या फिर बिहार के डिप्टी सीएम ही फर्जी हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्हें EC ने SIR मामले में नोटिस भेजा, तो उन्होंने जवाब भी भेजा, अब सवाल है कि क्या पटना और लखीसराय प्रशासन विजय सिन्हा को नोटिस देगा?


बीजेपी पर निशाना साधते हुए तेजस्वी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को मौके पर आकर हालात देखने चाहिए, दिल्ली में बैठकर बीजेपी के इशारे पर सब नहीं चल सकता। SIR के जरिए 65 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए, जिसमें 22 लाख मृत पाए गए, क्या हर मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र लिया गया?


इधर विवाद पर विजय कुमार सिन्हा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका नाम पहले पटना के बांकीपुर में पूरे परिवार के साथ दर्ज था। अप्रैल 2024 में उन्होंने लखीसराय में नाम जुड़वाने और पटना से नाम हटाने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन पटना से नाम नहीं हटा। SIR और ड्राफ्ट लिस्ट के बाद पता चला कि नाम दो जगह है, तो 5 अगस्त को BLO को पटना से नाम हटाने का आवेदन दिया गया है।

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