कफ सिरप माफिया शुभम जायसवाल को एक और झटका, अब पुलिस ने जो किया, जानकर आप भी कहेंगे- बढ़िया

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 08 Dec 2025, 03:55 pm
news-banner

यूपी में कफ सिरप केस में वाराणसी पुलिस ने आरोपी शुभम जायसवाल के दो करीबी सहयोगियों को दबोचा है। आरोपियों ने दवा लाइसेंस का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म बनाई और उस पर करोड़ों को कारोबार दिखाकर कफ सिरप की तस्करी करते थे।

वाराणसी में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई के मामले में कमिश्नरेट की एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शुभम जायसवाल के दो करीबी सहयोगियों विशाल जायसवाल और बादल आर्य को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि दोनों ने दवा लाइसेंस का दुरुपयोग कर फर्जी फर्में बनाईं और करोड़ों रुपये का कारोबार कागजों पर दिखाकर सिरप की तस्करी को अंजाम दिया। आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि उन्होंने लाखों के नकली बिल बनाए और सिरप की सप्लाई बांग्लादेश तक कराई है।


पूछताछ में यह भी सामने आया है कि हर खेप पर आरोपियों को 25 से 30 हजार रुपये तक मिलते थे और प्रति बोतल एक रुपये का कमीशन तय था। फर्म के खातों में पैसा आने पर वह रकम शैली ट्रेडर्स के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी। एसआईटी की टीम शुभम जायसवाल से जुड़े एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से भी पूछताछ कर रही है, जो बैंक खातों और लेन-देन की पूरी जानकारी रखता था। आरोपियों का दावा है कि एक वर्ष के भीतर करीब 7 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाया गया।


देश से बाहर भागा आरोपी शुभम जायसवाल, लुकआउट नोटिस

सोमवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीसीपी देवेश बसबाल ने बताया कि मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के देश से बाहर भाग जाने की जानकारी मिली है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लुकआउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है, ताकि इंटरपोल के माध्यम से उसे विदेश से गिरफ्तार कराया जा सके। पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।


केवल कागजों में चल रही थी फर्म, असल में हो रही थी तस्करी

आरोपियों ने बताया कि उनके नाम पर फर्म केवल कागजों में चलाई जा रही थी, जबकि असल में सिरप का माल उनकी दुकानों पर नहीं आता था। ई-वे बिल और टैक्स इनवॉइस उन्हीं की फर्मों के नाम से तैयार किए जाते थे, लेकिन माल कहीं और भेज दिया जाता था। आरोपियों का कहना है कि उन्हें हर महीने 20 से 30 हजार रुपये कैश में दिए जाते थे और पूरे नेटवर्क को देवेश जायसवाल नियंत्रित करता था।


जिन वाहनों के नंबर ई-वे बिल में दिखाए, वे अस्तित्व में ही नहीं

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिन वाहनों के नंबर ई-वे बिल में दिखाए गए थे, वे वाहन अस्तित्व में ही नहीं थे। कभी स्कूल बस तो कभी यात्री गाड़ियों के नंबर इस्तेमाल किए गए। कई फर्मों के संचालकों के पास कोई वैध डिग्री या दवा कारोबार का अनुभव भी नहीं था, फिर भी उन्हें फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी किए गए थे।


शैली ट्रेडर्स के मालिक भोला प्रसाद को गिरफ्तार कर चुकी है पुलिस

इस मामले में शुभम के पिता और शैली ट्रेडर्स के मालिक भोला प्रसाद को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। बाप-बेटे के खिलाफ 10 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं और ईडी की जांच में करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है। पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की सख्त कार्रवाई से दवा कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। इसी बीच करीब 10 दवा व्यापारियों ने कोर्ट की शरण लेकर पुलिस जांच और अफवाहों पर रोक लगाने की मांग की है, जिस पर न्यायालय में सुनवाई चल रही है।


यह भी पढ़ें- गोवा नाइट क्लब हादसा, अग्निकांड में अब तक क्या कुछ हुआ? जानें पूरा अपडेट

advertisement image