BREAKING: दिल्ली शराब घोटाला मामले में केजरीवाल और सिसोदिया बरी, कोर्ट ने कहा- CBI की चार्जशीट में खामियां, केजरीवाल रोते हुए बोले- जीवनभर ईमानदारी कमाई

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 27 Feb 2026, 11:42 am
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दिल्ली शराब घोटाला मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को CBI केस में बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोप सबूतों के अभाव में साबित नहीं होते। फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहे शराब घोटाला मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को CBI केस में बरी कर दिया है। शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में कोर्ट ने कहा कि दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप पर्याप्त सबूतों के अभाव में साबित नहीं होते। इस फैसले के बाद अदालत परिसर के बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई। मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने इसे सत्य की जीत बताया और कहा कि वे शुरुआत से ही खुद को निर्दोष बताते रहे हैं। फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के समर्थकों में खुशी का माहौल दिखा।


कोर्ट के बाहर भावुक हुए केजरीवाल, लगाया राजनीतिक साजिश का आरोप

फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि जिस तरह बीजेपी लगातार शराब घोटाले के आरोप दोहरा रही थी, उससे उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि आज अदालत ने साफ कर दिया है कि आरोप साबित नहीं हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया। केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं को जेल भेजा गया और उन्हें भ्रष्ट बताने के लिए चौबीस घंटे खबरें चलाई गईं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने जिंदगी भर ईमानदारी से काम किया है और देश की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील भी की।


CAG रिपोर्ट में रेवेन्यू लॉस और नीति में गड़बड़ियों का जिक्र

पिछले साल दिल्ली की शराब नीति को लेकर CAG की एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें सरकार को 2026 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की बात कही गई थी। रिपोर्ट में लाइसेंस देने की प्रक्रिया में कथित खामियों और कुछ फैसलों में अनियमितताओं का जिक्र किया गया था। यह भी कहा गया था कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने एक्सपर्ट पैनल के सुझावों को दरकिनार किया। कैबिनेट से मंजूरी लेने और उपराज्यपाल की स्वीकृति जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए थे। शिकायतों के बावजूद कुछ कंपनियों को नीलामी में हिस्सा लेने और लाइसेंस रिन्यू करने की अनुमति देने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज थी, जिसे लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा था।


गिरफ्तारी, जमानत और हाईकोर्ट में सुनवाई की पूरी कहानी

इस मामले में ED और CBI दोनों एजेंसियों ने जांच की थी। ED ने 21 मार्च 2024 को केजरीवाल को गिरफ्तार किया था, जबकि 26 जून को CBI ने उन्हें जेल से हिरासत में लिया। 12 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली और वे 13 जुलाई को जेल से बाहर आए। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान मुकदमा चलाने की मंजूरी को लेकर भी बहस हुई। ED की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा था कि मंजूरी ली गई थी, जबकि वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने इसका विरोध किया। अब ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद इस पूरे मामले को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।


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