कानपुर के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आरिफ चौंकाने वाले मिले सबूत, मामला जानकर शॉक्ड हो जाएंगे आप!

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 15 Nov 2025, 02:50 pm
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दिल्ली ब्लास्ट के बाद कानपुर से गिरफ्तार कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर आरिफ को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं। एटीएस के मुताबिक शाहीन की गिरफ्तारी के बाद वह भागने की फिराक में था। उसने शाहीन और मुजम्मिल से सैकड़ों बार बात की थी। आइये पूरा अपडेट जानते हैं।

एटीएस और एनआईए के इनपुट पर अशोक नगर स्थित फ्लैट से डॉ. आरिफ को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को उसके कमरे से बैग और अन्य सामान पैक मिला, जिससे यह आशंका जताई गई कि वह कानपुर से बाहर भागने की तैयारी में था। कमरे से मिले लैपटॉप और अन्य डिजिटल सबूतों ने सुरक्षा एजेंसियों को कई अहम जानकारियां दी हैं। इन सबूतों से यह स्पष्ट हुआ कि आरिफ के संबंध फरीदाबाद में पकड़े गए डॉ. मुजम्मिल के साथ-साथ डॉ. शाहीन से भी गहरे थे। धमाके की योजना बनने के बाद से तीनों के बीच लगातार बातचीत होती रही थी।


जांच में सामने आया कि आरिफ के मोबाइल से सुरक्षा एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। एक सप्ताह के भीतर उसने डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन से 39 वॉयस कॉल और 43 वॉट्सऐप कॉल की थीं। इसके अलावा अलग-अलग नंबरों पर 200 से ज्यादा वॉट्सऐप मैसेज भेजे या प्राप्त किए गए। इनमें से 25 मैसेज डिलीट मिले, जिनकी रिकवरी कर एजेंसियां बातचीत की प्रकृति समझने की कोशिश कर रही हैं। उसके लैपटॉप से भी कुछ संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है, जिसे तकनीकी टीम गहराई से खंगाल रही है।


डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी के बाद भागने की फिराक में था आरिफ

अधिकारियों का मानना है कि डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी के बाद आरिफ को शक हो गया था कि पुलिस उसके करीब पहुंच चुकी है, इसलिए वह जल्दबाजी में भागने की योजना बना रहा था। जांच में यह भी पता चला कि वह तीन मोबाइल फोन इस्तेमाल करता था, दो आईफोन और एक की-पैड फोन। एजेंसियों को उसका एक आईफोन और की-पैड फोन बरामद हो चुका है, जबकि दूसरा आईफोन, जिसे उसने 27 अक्टूबर को खरीदा था, उसके कमरे से मिला है।


शाहीन के भाई डॉ. परवेज का नेटवर्क खंगाल रहीं खुफिया एजेंसियां

खुफिया एजेंसियां चमनगंज और बेकनगंज क्षेत्रों में डॉ. शाहीन और उसके भाई डॉ. परवेज के नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं। जानकारी मिली है कि डॉ. परवेज के दो साले इन्हीं इलाकों में कारोबार करते थे, जिसके कारण उनका प्रभाव काफी मजबूत था। ये लोग धार्मिक आयोजनों का भी संचालन करते थे, जिनमें डॉ. परवेज शामिल होता था। इन आयोजनों में बाहरी लोगों की भी नियमित रूप से आवाजाही रहती थी, जिससे एजेंसियां अब इन संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।


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